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मोदी-जिनपिंग और पुतिन के तालमेल से क्यों बौखलाया ट्रंप का ये चेला, भारत की आलोचना करते हुए ले आया जातिवादी एंगल

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Sep 01, 2025 02:05 pm IST,  Updated : Sep 01, 2025 02:05 pm IST

व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को लेकर फिर बेतुकी बातें कही हैं। रूस-यूक्रेन जंग को लेकर नवारो ने जातिवादी एंगल से जोड़ा है और ‘ब्राह्मण’ का जिक्र किया है।

Trump Adviser Peter Navarro- India TV Hindi
Trump Adviser Peter Navarro Image Source : AP

न्यूयॉर्क: रूस से तेल की खरीद को लेकर व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत को लेकर बदजुबानी की है। पीटर नवारो ने ऐसा बयान दिया है जिसका मतलब उनको शायद ही पता हो। रूस से भारत की तेल खरीद को नवारो ने जातिवादी एंगल दिया है। पीटर नवारो ने कहा है कि ‘ब्राह्मण’ भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं और इसे रोकने की जरूरत है। 

नवारो लगातार दे रहे हैं बेतुके बयान

व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने ‘फॉक्स न्यूज संडे’ के साथ एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘देखिए (प्रधानमंत्री) मोदी एक महान नेता हैं।’’ उन्होंने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता हैं और उन्हें ‘‘समझ नहीं आता कि भारतीय नेता किस तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सहयोग कर रहे हैं।’’ नवारो ने कहा, ‘‘तो मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा, भारतीय जनता कृपया समझिए कि यहां क्या हो रहा है। आपके पास 'ब्राह्मण' हैं जो भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हमें इसे रोकने की जरूरत है।’’ नवारो पिछले कुछ दिनों से लगातार भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। 

ट्रंप ने भारत पर लगाया है भारी टैरिफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूसी तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। भारत ने उस पर लगाए गए शुल्क को ‘अनुचित और विवेकहीन’ बताया है। उनसे इस बारे में भी सवाल पूछा गया था कि क्या भारत पर अतिरिक्त शुल्क लागू करना पुतिन को ‘घुटने टेकने के लिए मजबूर’ करने के वास्ते पर्याप्त है। इस पर उन्होंने कहा, ‘‘खैर, साफ कहें तो हमने अब भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, लेकिन सवाल यह है कि आप वास्तव में खुद को नुकसान पहुंचाए बिना कितना अधिक शुल्क लगाना चाहते हैं?’’

'पहले तेल नहीं खरीदता था भारत'  

नवारो ने कहा कि फरवरी 2022 में पुतिन द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण से पहले भारत रूसी तेल नहीं खरीदता था और उसकी खरीद बहुत, बहुत कम मात्रा में होती थी। उन्होंने कहा, ‘‘फिर क्या हुआ? खैर, रूसी रिफाइनरों ने भारत में बड़ी तेल कंपनियों के साथ साठ-गांठ की। पुतिन, मोदी को कच्चे तेल पर छूट देते हैं। वो इसे संशोधित करते हैं और फिर यूरोप, अफ्रीका तथा एशिया को ऊंचे दाम पर बेचते हैं, वो ढेर सारा पैसा कमाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इससे रूसी युद्ध मशीन को ईंधन मिलता है और भारत क्रेमलिन के लिए सिर्फ तेल धन शोधन केंद्र बन गया है।'' 

भारत ने साफ किया है अपना रुख

रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की परिस्थितियों से प्रेरित है। यूक्रेन पर हमले के बाद जब से पश्चिमी देशों ने रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगाए हैं तब से रूस भारत का शीर्ष ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बन गया है। नवारो ने पहले यूक्रेन संघर्ष को ‘मोदी का युद्ध’ बताया था और कहा था कि ‘शांति का मार्ग’ आंशिक रूप से ‘नई दिल्ली से होकर’ गुजरता है। 

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