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बिहार में चुनाव प्रचार बंद तो आज क्या-क्या करेंगे पार्टी वर्कर?

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 05, 2025 08:37 am IST,  Updated : Nov 05, 2025 08:43 am IST

बिहार में आज चुनाव प्रचार बंद है तो इस दिन सियासी दलों के कार्यकर्ता अपने घर खाली ना बैठकर किन महत्वपूर्ण कामों को करते हैं जिससे निष्पक्षता बनी रहे और उनका एक-एक वोट पोलिंग बूथ पर जाकर पड़ जाए.

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किन बड़ी जिम्मेदारियों को निभाते हैं पार्टी वर्कर? Image Source : PTI

नई दिल्ली: बिहार में आज 5 नवंबर को 121 विधानसभा सीटों चुनाव प्रचार बंद है और कल यानी 6 नवंबर को मतदान होना है। पहले फेज में 18 जिलों की 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। इस दौरान 3 करोड़ 75 लाख 13 हजार 302 वोटर मतदान करेंगे। अब आपके मन में ये सवाल होगा कि जब चुनाव प्रचार पर रोक है तो आज सियासी दलों के कार्यकर्ता क्या करेंगे। वे अपने घर पर खाली तो बैठेंगे नहीं। आइए इस खबर में समझते हैं कि वोटिंग से ठीक एक दिन पहले राजनीतिक पार्टियों के वर्कर्स को क्या काम सौंपा जाता है और किन सियासी गतिविधियों में वे दिनभर जुटे रहते हैं।

सियासी दलों के बस्ते बांटना

आज का दिन जब चुनाव प्रचार से सियासी दलों के कार्यकर्ता मुक्त हैं तो उनका सबसे पहला काम अपने बूथ अध्यक्षों तक बस्ता पहुंचाना होता है। इस बस्ते में उस वार्ड की वोटर लिस्ट, उम्मीदवार का नाम, फोटो और पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न, पार्टी का झंडा और अन्य प्रचार सामग्री होती है। इस बस्ते में वो फॉर्म भी होता है जिसे भरकर रिटर्निंग ऑफिसर को देना होता है। इसी के जरिए पोलिंग बूथ पर पोलिंग एजेंट बनाया जाता है। इस बस्ते में सियासी पार्टी की तरफ से दिया गया भत्ता भी होता है। यह धनराशि कम और ज्यादा हो सकती है। अमूमन 500 से 1,500 रुपये इस बस्ते में होते हैं।

पोलिंग एजेंट चुनने का काम

आज के दिन बूथ अध्यक्ष अपना पोलिंग एजेंट चुनता है। उसे प्रक्रिया समझाता है कि कैसे पोलिंग बूथ पर जाकर पोलिंग एजेंट बनना है. जिसे पोलिंग एजेंट बनना होता है उसे बस्ते में मिला फॉर्म वोटिंग वाले दिन मतदान शुरू होने से पहले रिटर्निंग ऑफिसर को देना होता है। जो भी पोलिंग एजेंट बनता है वह उम्मीदवार की ओर अधिकृत होता है। वह स्थानीय व्यक्ति ही होता है। उसका काम पोलिंग बूथ पर निष्पक्षता की निगरानी करना होता है। यही पोलिंग एजेंट वोटिंग शुरू होने से पहले ईवीएम पर मॉक पोलिंग में भी भाग लेता है।

पार्टी वर्कर्स का स्ट्रैटेजिक रिवीजन

जिस दिन चुनाव प्रचार बंद होता है उस दिन पार्टी वर्कर्स को मतदान वाले दिन के लिए अपनी स्ट्रैटेजी को रिवाइज करने का मौका भी मिलता है। चूंकि चुनाव प्रचार, वोट मांगना-मंगवाना सब हो चुका होता है। अधिकतर वोटर मन बना चुके होते हैं कि उन्हें किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट करना है। ऐसे जब चुनाव प्रचार नहीं करना होता है तो पार्टी कार्यकर्ता रणनीति बनाते हैं कि घर-घर से अपने वोटर को निकालकर कैसे पोलिंग बूथ तक पहुंचाना है। जो लोग वोटिंग के प्रति उदासीन रहते हैं उनको पोलिंग बूथ तक कैसे पहुंचाया जाए।

वोटर्स को पर्ची पहुंचाना

जब आप वोट डालने जाते हैं तब आपको अपनी पहचान के प्रमाण के साथ वोटिंग वाली पर्ची की जरूरत भी होती है जिससे पोलिंग बूथ पर वोटर लिस्ट में आपका नाम आसानी से ढूंढा जा सके. वैसे तो BLO घर-घर तक लोगों की पर्ची पहुंचा देते हैं। लेकिन जिन लोगों के पास किसी वजह से पर्ची नहीं पहुंची होती है उसकी पर्ची पार्टी के बूथ अध्यक्ष बना देते हैं और उन तक पहुंचा देते हैं। हालांकि, ये काम वोटिंग वाले दिन पोलिंग बूथ के बाहर भी किया जाता है।

विरोधी दल के कार्यकर्ताओं पर नजर

वोटिंग से संबंधित तमाम कामों के अलावा पार्टी का वर्कर्स का एक काम ये भी होता है कि विरोधी पार्टी कोई लालच देकर या कुछ बांटकर वोटिंग से एक दिन पहले लोगों को इंफ्लुएंस ना करें। कोई वोटर्स का बरगला ना पाए। उनके मत को खरीद ना पाए क्योंकि निष्पक्ष मतदान के लिए वोटिंग होने तक सभी उम्मीदवारों के बीच लेवल प्लेइंग फील्ड का होना जरूरी है।

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