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परमा एकादशी व्रत पारण का सही समय क्या है? जानिए उपवास खोलने की विधि और जरूरी नियम

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 11, 2026 12:48 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 12:48 pm IST

परमा एकादशी का व्रत बेहद दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास में पड़ता है और इसका संयोग तीन साल में केवल एक बार बनता है। जानिए परमा एकादशी 2026 व्रत का पारण टाइम क्या है और उपवास कैसे खोलना चाहिए, साथ ही इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियम भी जानें।

Parama Ekadashi - India TV Hindi
परमा एकादशी 2026 व्रत पारण मुहूर्त Image Source : FILE IMAGE

Parama Ekadashi 2026 Paran Time:परमा एकादशी की गिनती सबसे पुण्यदायी व्रतों में होती है। यह व्रत पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में पड़ता है। यह शुभ संयोग हर 3 साल में आता है, जिस वर्ष हिंदू कैलेंडर में अधिक मास पड़ता है। मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब व्रत का पारण शुभ मुहूर्त और सही विधि से किया जाए। यहां जानिए परमा एकादशी 2026 व्रत पारण का सही समय। 

पारण का सही समय क्या है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आज अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि की शुरुआत 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर हुई और समाप्ति 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर होगी। इस बार 11 जून को सूर्योदय के समय शुद्ध एकादशी तिथि है। ऐसे में व्रत का पारण 12 जून को किया जाएगा। व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण करना शुभ और जरूरी माना जाता है।

इस तरह करें व्रत का पारण

द्वादशी तिथि पर बह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें और विधिवत पूजा करें। इसके बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अन्न या अपनी क्षमता के अनुसार दान दें। दान-पुण्य के बाद सात्विक और हल्का भोजन करके व्रत खोलना चाहिए।

दान-पुण्य क्यों जरूरी

एकादशी और द्वादशी पर दान का विशेष महत्व है। कहते हैं कि इस दौरान अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य मिलता है और जीवन में जरूरी संसाधनों की कमी नहीं होती। सच्चे मन से किए गए इस छोटे से कर्म से व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक संतोष भी मिलता है।

इन नियमों का ध्यान

एकादशी व्रत करने वालों को व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। एक दिन पहले ही इस व्रत की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में दशमी के दिन पर तामसिक और भारी भोजन न करें। एकादशी पर क्रोध, झूठ, चुगली, निंदा, हिंसा और विवाद से दूर रहें। इस दौरान मन को शांत रखते हुए ज्यादा समय विष्णु भक्ति, मंत्र जाप और पूजा-पाठ में लगाएं।

परमा एकादशी का महत्व

परमा एकादशी अत्यंत दुर्लभ और शुभ तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और नियम से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत को करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति और वैभव आता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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