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बिहार सरकार ने ‘नीलगाय’ शब्द के इस्तेमाल पर लगाई रोक, डिप्टी सीएम ने बताया किस नाम से बुलाएं

 Reported By: Nitish Chandra Edited By: Mangal Yadav
 Published : Feb 03, 2026 02:22 pm IST,  Updated : Feb 03, 2026 02:43 pm IST

बिहार में ‘नीलगाय‘ को ‘घोड़ पड़ास’ या नील बकरी कहा जाएगा। सरकार ने ‘नीलगाय‘ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसकी जानकारी डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने दी है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

पटनाः बिहार सरकार ने ‘नीलगाय’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने मंगलवार को सदन में कहा कि प्रदेश के लोगों को नीलगाय की जगह ‘घोड़ पड़ास’ या नील बकरी शब्द का ही उपयोग करना चाहिए। डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दस्तावेज, सवाल जवाब और योजनाओ में ‘नीलगाय’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि इस शब्द के इस्तेमाल से इसकी वृद्धि और संरक्षण को लेकर लोगों की भावनाएं जुड़ जाती हैं।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने बताई वजह

विजय सिन्हा ने कहा कि यह मामला काफी संवेदनशील है। नील गाय की जगह नील बकरी या घोड़ पड़ास शब्द का इस्तेमाल केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं बल्कि समाज और लोगों की भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

दरअसल, नीलगाय खेतों में फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिए कई जगहों पर नीलगाय को मारने के आदेश भी हैं। नीलगायों को मारने के लिए सरकार ने शूटर भी हायर किया हुआ है। बिहार के लोगों का कहना है कि नीलगायों की वजह से उनकी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। 

नीलगाय झुंड में चलते हैं और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं

बता दें कि वैशाली, पूर्वी चंपारण, बक्सर, सीवान और समस्तीपुर समेत कई जिलों में 'नीलगाय' को मारने के लिए सरकार ने अभियान चलाया है। एक अनुमान के अनुसार, इन जिलों में घोड़परास की कुल संख्या लगभग 3 लाख है, जबकि जंगली सूअरों की आबादी लगभग 67,000 है। ये दोनों जानवर झुंड में चलते हैं और एक दिन में एकड़ फसल बर्बाद कर देते हैं। राज्य के कुछ जिलों में किसान अपनी पक रही फसलों को नीलगाय और जंगली सूअरों से बचाने के लिए पूरी रात जागते हैं। 

 

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