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बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के नेताओं की नई टीम, ललन कुमार सर्राफ और राजेंद्र प्रसाद गुप्ता बने उप नेता

 Reported By: Nitish Chandra, Edited By: Shakti Singh
 Published : May 23, 2026 03:58 pm IST,  Updated : May 23, 2026 03:58 pm IST

बिहार राज्यपाल की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि उपनेताओं और मुख्य सचेतकों को सभी सुविधाएं और भत्ते 15 मई से मिलेंगे, जबकि उन्हें यह जिम्मेदारी 23 मई को दी गई है।

Lallan Kumar Saraf- India TV Hindi
ललन कुमार सर्राफ Image Source : FB/LALLAN KUMAR SARAF FAN CLUB

बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के नेताओं की नई टीम का ऐलान हो गया है। सीएम सम्राट चौधरी की अनुशंसा पर राज्यपाल ने ये नियुक्तियां की हैं। ललन कुमार सर्राफ और प्रो. राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को उप नेता बनाया गया है। वहीं, संजय सिंह मुख्य सचेतक और जनक राम उप मुख्य सचेतक बने हैं। नीरज कुमार और रीना देवी को भी सचेतक बनाया गया है। राज्यपाल की तरफ से जारी किए गए आदेश में बताया गया है कि उप नेता और मुख्य सचेतक को मंत्री स्तर की सुविधा मिलेगी। वहीं, उप मुख्य सचेतक और सचेतकों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाएगा।

बिहार विधान परिषद में जिन नेताओं को नई जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें सभी सुविधाएं और भत्ते 15 मई से मिलेंगे। हालांकि, राज्यपाल का आदेश एक सप्ताह बाद 23 मई को जारी किया गया है। संसदीय कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी है।

छह राज्यों में विधान परिषद की व्यवस्था

देश के छह राज्यों में विधान परिषद की व्यवस्था है। ये राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना। विधान परिषद की शक्तियां और कार्य राज्यसभा के समान होते हैं। जिस तरह देश में राज्यसभा और लोकसभा मिलकर काम करते हैं, लेकिन मुख्य काम लोकसभा का होता है। लगभग उसी तरह राज्य में विधानसभा और विधान परिषद मिलकर काम करते हैं। हालांकि, देश के अन्य 22 राज्यों में विधान परिषद नहीं हैं। यहां विधानसभा से ही सारा काम होता है।

बिहार विधानसभा में 75 सदस्य

बिहार विधान परिषद, बिहार राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। विधानसभा के विपरीत यह एक स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता है। बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें (सदस्य) हैं। इनमें से 63 निर्वाचित और 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं। इन सीटों का बंटवारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत होता है। सदन के एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। विधान परिषद के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए। वर्तमान में भाजपा नेता अवधेश नारायण सिंह बिहार विधान परिषद के सभापति हैं।

किस आधार पर चुने जाते हैं सदस्य

27 सदस्य: बिहार विधानसभा के विधायकों द्वारा चुने जाते हैं।

24 सदस्य: स्थानीय निकायों (नगर निगम, जिला बोर्ड, पंचायत आदि) द्वारा चुने जाते हैं।
6 सदस्य: राज्य के माध्यमिक या उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं।
6 सदस्य: राज्य के पंजीकृत स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं।
12 सदस्य: राज्यपाल द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और सहकारिता के क्षेत्र से मनोनीत किए जाते हैं।

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