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ये क्या! 7 साल पहले मर चुके टीचर ने निकाल लिया एरियर; सुपौल में फर्जी हस्ताक्षर कर 1 करोड़ का घोटाला

 Published : Apr 09, 2026 11:35 am IST,  Updated : Apr 09, 2026 11:35 am IST

बिहार के सुपौल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहां मदरसा के सचिव और हेडमास्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर रिटायर शिक्षकों के नाम पर एरियर की 1 करोड़ रुपये की राशि निकल ली गई।

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सुपौल में साक्ष्य जुटाने पहुंची जांच टीम। Image Source : REPORTER INPUT

बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मीनियां पंचायत के बरमोतरा वार्ड 1 स्थित मदरसा हासिमिया में फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि मदरसा के सचिव और हेडमास्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर रिटायर शिक्षकों के नाम पर एरियर की लगभग एक करोड़ रुपये की राशि की अवैध निकासी कर ली गई। हैरानी की बात यह है कि जिन शिक्षकों के नाम पर राशि निकाली गई, उनमें से कुछ की वर्षों पहले मृत्यु भी हो चुकी है। इस पूरे मामले में मदरसा के पूर्व प्रधानाध्यापक सह वर्तमान सहायक शिक्षक मो. नाजिम अली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कैसे हुआ खुलासा?

बताया जा रहा है कि यह मामला तब उजागर हुआ जब वर्तमान हेडमास्टर मो. अरशद और नाजिम अली के बीच इस फर्जीवाड़े को लेकर विवाद हुआ। मामला बढ़ते-बढ़ते मदरसा के सचिव मो. कासिम तक पहुंचा, जहां आपसी सहमति नहीं बनने पर यह विवाद प्रशासनिक स्तर तक जा पहुंचा। 6 अप्रैल को सचिव मो. कासिम इस मामले की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट में आयोजित प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंचे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वरीय अधिकारियों ने जांच का आदेश दिया। इसके बाद मंगलवार को डीपीओ स्थापना सुपौल आलोक शेखर और बीईओ सह बीपीआरओ छातापुर देश कुमार जांच के लिए मदरसा हासिमिया पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने मौके पर दोनों पक्षों को बुलाकर दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच-पड़ताल की।

एरियर के नाम पर हर शिक्षक के खाते से 15-20 लाख की निकासी

हालांकि, मौके पर मौजूद सचिव मो. कासिम ने दावा किया कि हस्ताक्षरों का मिलान नहीं हो पाया है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है। इसके बावजूद विभाग अभी जांच जारी होने की बात कह रहा है। इस मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सचिव मो. कासिम के अनुसार, मदरसा की स्थापना वर्ष 1977-78 में हुई थी और उस समय पांच शिक्षक कार्यरत थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से लंबित एरियर भुगतान के नाम पर एक-एक शिक्षक के खाते से 15 से 20 लाख रुपये तक की निकासी की गई है। इस आधार पर कुल घोटाले की राशि 50 लाख रुपये से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।

मध्याह्न भोजन योजना में भी अनियमितता

उन्होंने यह भी बताया कि जिन शिक्षकों के नाम पर राशि निकाली गई, उनमें से एक की करीब 7 साल पहले मौत हो चुकी है। ऐसे में मृत व्यक्ति के नाम से बैंक खाते का संचालन और उसमें सरकारी राशि का अंतरण गंभीर सवाल खड़े करता है। सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि मो. नाजिम अली वर्तमान में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन भी करते हैं, जिसमें भी अनियमितता बरती जा रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि मदरसा में अब केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि बाकी सभी रिटायर हो चुके हैं। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर एरियर भुगतान और उसकी निकासी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

DM सावन कुमार बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी बीईओ सह बीपीआरओ देश कुमार ने कहा कि हेडमास्टर और पूर्व हेडमास्टर के बीच फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है। पुराने अभिलेखों से हस्ताक्षरों का मिलान कराया जाएगा और आवश्यक दस्तावेजों की मांग की गई है।

वहीं, डीपीओ स्थापना आलोक शेखर ने बताया कि प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में प्राप्त आवेदन के आधार पर जांच की जा रही है। जाली हस्ताक्षर कर एरियर भुगतान का मामला सामने आया है और जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुपौल DM सावन कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच टीम भेजी गई है और रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

(रिपोर्ट- संत सरोज)

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