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बिहार राज्यसभा उपचुनाव में सुशील मोदी की जीत पक्की, निर्विरोध चुना जाना तय

 Written By: Bhasha
 Published : Dec 03, 2020 11:03 pm IST,  Updated : Dec 03, 2020 11:03 pm IST

बिहार में राज्यसभा की एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में नामांकन के अंतिम दिन बृहस्पतिवार तक विपक्षी महागठबंधन द्वारा कोई उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से भाजपा उम्मीदवार सुशील कुमार मोदी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है।

बिहार राज्यसभा उपचुनाव में सुशील मोदी की जीत पक्की, निर्विरोध चुना जाना तय- India TV Hindi
बिहार राज्यसभा उपचुनाव में सुशील मोदी की जीत पक्की, निर्विरोध चुना जाना तय Image Source : PTI

पटना: बिहार में राज्यसभा की एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में नामांकन के अंतिम दिन बृहस्पतिवार तक विपक्षी महागठबंधन द्वारा कोई उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से भाजपा उम्मीदवार सुशील कुमार मोदी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के कारण यह सीट खाली हुई है। रामविलास अपने कैबिनेट सहयोगी रविशंकर प्रसाद के पटना साहिब लोकसभा सीट से जीतने के बाद खाली हुयी इस सीट पर पिछले साल उपचुनाव में निर्विरोध चुने गये थे। 

हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में जद (यू) प्रमुख और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को अस्वीकार्य बताते हुए अकेले चुनावी मैदान में उतरी लोजपा के प्रमुख और रामविलास के पुत्र चिराग पासवान ने शनिवार को कहा था कि यह भाजपा की सीट है और वह इस बात का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है कि वह किसे चुनाव मैदान में उतारना चाहती है। हालांकि, राज्यसभा की इस सीट के लिए निर्दलीय प्रत्याशी श्याम नंदन प्रसाद द्वारा भी नामांकन दाखिल किया गया है पर नियमानुसार आवश्यक दस प्रस्तावक विधायकों की सूची उन्होंने जमा नहीं की है। 

ऐसे में सुशील मोदी का निर्विरोध चुना जाना तय सा है। इस उपचुनाव में नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख सात दिसंबर है। विपक्षी महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस उपचुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने का राजद का इरादा कभी नहीं था। चूंकि यह सीट दलित समुदाय से आने वाले दिग्गज नेता रामविलास पासवान के निधन से रिक्त हुआ था। इसलिए लोग चाहते थे कि बिहार के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उनके सम्मान में श्रद्धांजलि स्वरुप यदि उनकी पत्नी (रीना पासवान) को उम्मीदवार बनाया जाता तो निश्चित रूप से राज्य का हर निवासी अपने को गौरवान्वित महसूस करता। 

राजद प्रवक्ता ने कहा कि राजद द्वारा राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करने की बात आधिकारिक रूप से कभी नहीं कही गई थी बल्कि राजग के लोगों द्वारा ही ऐसा कयास लगाया जा रहा था क्योंकि राजग के घटक दलों के बीच अंतर्विरोध एवं अविश्वास की वजह से उस गठबंधन के नेता स्वयं ही सशंकित थे।

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