सालों से नागरिकता के लिए भटक रहीं नेपाली मूल की महिलाओं को अब भारतीय नागरिकता मिलने वाली है। भारत नेपाल के बॉर्डर पर किशनगंज जिले में इसे लेकर विशेष तैयारी की गई है। जिले के तीन प्रखंड ठाकुरगंज, दिघलबैंक और टेढ़ागाछ में नेपाल से विवाह कर भारत आई महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है। इनमें कई महिलाएं सालों से भारत में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। लेकिन कुछ लोगों का नाम मतदाता पुनरीक्षण कार्य के दौरान और कुछ का जरूरी दस्तावेजों की कमी होने से अभी तक भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं सका है।
शादी कर भारत आई नेपाली महिलाओं के मिलेगी नागरिकता
इन महिलाओं के लिए बिहार के किशनगंज जिले के सभी सात प्रखंडों में 8, 15 और 22 जुलाई को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इसमें महिलाओं को नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देने के साथ ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में भी सहायता दी जाएगी। इसके लिए जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने प्रखंड विकास अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं।

आवेदन की प्रक्रिया शुरू
आपको बता दें कि नेपाली महिलाएं भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 (1) (सी) के तहत विदेशी महिला पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं। वहीं नागरिकता देने के सवाल पर किशनगंज सदर विधायक कमरूल हुदा ने कहा कि हमारी हमेशा यह मांग रही है कि सभी धर्म के लोगों को नागरिकता देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ हिंदू ही नहीं अन्य देशों में रहने वाले मुसलमान भी प्रताड़ित है वो अगर यहां आते हैं तो उन्हें भी नागरिकता मिले। हुदा ने कहा कि इसमें संशोधन होना चाहिए। अगर सभी को नागरिकता नहीं दी जाएगी और किसी खास धर्म जाति के लोगों को दी जाएगी तो हम इसका विरोध करेंगे।
वही बिहार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने कहा कि संसद के द्वारा कानून पास किया गया था और इसी आधार पर नागरिकता दी जा रही है।
इनपुट: राजेश दुबे (किशनगंज)