1. Hindi News
  2. बिज़नेस
  3. खाद्य उत्पादों में पाए गए खतरनाक कीटनाशक के अंश: केंद्र

खाद्य उत्पादों में पाए गए खतरनाक कीटनाशक के अंश: केंद्र

 Written By: India TV Business Desk
 Published : Oct 02, 2015 06:30 pm IST,  Updated : Oct 12, 2015 07:42 pm IST

नई दिल्ली: सरकार द्वारा विभिन्न खुदरा एवं थोक बिक्री दुकानों से इकट्ठा कई सब्जियों, फलों, दूध और अन्य खाद्य उत्पादों के नमूनों में कीटनाशक के अंश पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक

खाद्य उत्पादों में...- India TV Hindi
खाद्य उत्पादों में पाए गए खतरनाक कीटनाशक के अंश: केंद्र

नई दिल्ली: सरकार द्वारा विभिन्न खुदरा एवं थोक बिक्री दुकानों से इकट्ठा कई सब्जियों, फलों, दूध और अन्य खाद्य उत्पादों के नमूनों में कीटनाशक के अंश पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। जैविक उत्पादों की बिक्री करने वाली दुकानों से भी इकट्ठे किए गए उत्पादों में कीटनाशक के अंश पाए गए है। गौरतलब है कि 2005 में शुरू हुई केंद्रीय कीटनाशक अवशिष्ट निगरानी योजना के तहत देश भर से इकट्ठा 20,618 नमूनों से 12.50 प्रतिशत में गैर-स्वीकृत कीटनाशक पाया गया। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान इकट्ठा नमूनों की जांच 25 प्रयोगशालाओं में गई।

18.7 प्रतिशत नमूनों में कीटनाशकों के अंश

प्रयोगशाला में उक्त नमूनों में एसीफेट, बाइफेंथ्रीन, एसीटामिप्रिड, ट्राइजोफोस, मेटलैक्जिल, मेलैथियन, एसीटैमिप्रिड, काबार्सल्फान, प्रोफेनोफोस और हेक्साकोनाजोल आदि के अंश पाए गए। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक 18.7 प्रतिशत नमूनों में कीटनाशकों के अंश पाए गए जबकि एमआरएल (अधिकतम अवशिष्ट सीमा) 543 नमूनों (2.6 प्रतिशत) में पाया गया। एमआरएल की संस्तुति भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार दे रहा है। मंत्रालय ने एक हा जिन 20,618 नमूनों की जांच की गई उनमें 12.5 प्रतिशत नमूनों में गैर-स्वीकृत कीटनाशक पाए गए।

सब्जियों में मिला एसीफेट

रिपोर्ट में कहा गया कि खुदरा एवं उत्पादन क्षेत्र के पास स्थित बाजार से इकट्ठा सब्जियों के 1,180 नमूनों, फलों के 225, मसालों के 732, चावल के 30 और दलहन के 43 नमूनों में गैर-स्वीकृत कीटनाशक के अंश पाए गए। मंत्रालय ने सब्जियों में एसीफेट, फाइफेन्थ्रिन, ट्रायाजोफोस, एसीटामिप्रिड, मेटलैक्सिल और मैलेथियन की पहचान की।

फल-सब्जी, मसाले नहीं सुरक्षित

फलों में एसीफेड, एसीटामिप्रिड, काबार्सल्फान, साइपरमेथ्रिन, प्रोफेनोफोस, क्विनैल्फोस और मेटलैक्सिल पाए गए। चावल में विशेष तौर पर प्रोफेनोफोस, मेटलैक्सिल और हेक्सैकोनाजोल और दलहन में ट्रायजोफोस, मेटलैक्सिल, कार्बारिल और एसीफेट के अंश पाए गए। मंत्री ने कषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) बाजारों और जैविक उत्पाद बेचने वाली दुकानों से फल-सब्जी, मसाले, लाल मिर्च का चूर्ण, करी पत्ते, चावल, गेहूं, दाल, मछली-सामुद्रिक उत्पाद, मांस, अंडे, चाय, दूध आदि के नमूने इकट्ठा किए गए थे।

टी-बोर्ड ने दी सफाई

टी बोर्ड-भारत ने इस रिपोर्ट पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उसने एक जनवरी 2015 से प्‍लांट प्रोटेक्‍शन कोड लागू किया है, जिसका पालन सभी प्रतिभागी सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके तहत चाय  उत्‍पादकों और निर्माताओं के लिए रसायनों के उपयोग और उनकी समीक्षा को अनिवार्य किया गया है। उनसे रसायनों को उपयोग को कम करने और केवल स्‍वीकृत रसायनों का उपयोग सुरक्षित तरीके से करने के लिए कहा गया है। बोर्ड इस बात को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि चाय में किसी भी तरह का हानिकारक कीटनाशक उपस्थित न हो। 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। बिज़नेस से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।