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पर्वतारोहण का इतिहास रचा! जशपुर के आदिवासी युवाओं ने 12 घंटे में खोला 5,340 मीटर ऊंची 'जगतसुख पीक' पर नया रूट, नाम दिया 'विष्णु देव रूट'

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Oct 30, 2025 09:18 pm IST,  Updated : Oct 30, 2025 09:18 pm IST

जशपुर जिले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊंची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला है।

भारतीय पर्वतारोहण में...- India TV Hindi
भारतीय पर्वतारोहण में नया अध्याय जुड़ा Image Source : REPORTER

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के आदिवासी युवाओं के एक साहसी दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में एक अविस्मरणीय उपलब्धि हासिल की है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर (लगभग 17,520 फीट) ऊंची जगतसुख पीक पर एक नया और अत्यंत कठिन 'आल्पाइन रूट' खोलकर तिरंगा फहराया। इस ऐतिहासिक मार्ग को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है।

सिर्फ 12 घंटे में पूरी की चढ़ाई

पर्वतारोहण की दुनिया में इसे एक असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई बेस कैंप से मात्र 12 घंटे में पूरी कर ली। यह चढ़ाई आल्पाइन शैली में की गई, जिसमें पर्वतारोही बिना फिक्स रोप, बिना सपोर्ट स्टाफ और बिना पहले से तय शिविरों के, पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ते हैं।

युवाओं ने हिमालय में गाड़े झंडे
Image Source : REPORTERयुवाओं ने हिमालय में गाड़े झंडे

'देशदेखा' में मिला प्रशिक्षण

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम के पांचों सदस्य पहली बार हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचे थे। इन सभी ने जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत के पहले प्राकृतिक एडवेंचर खेल प्रशिक्षण क्षेत्र "देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया" में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया था। अभियान प्रमुख और मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जशपुर प्रशासन ने विश्वस्तरीय मानकों के लिए अमेरिका, स्पेन और नॉर्वे के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को प्रशिक्षण से जोड़ा था। दो महीनों के कठोर प्रशिक्षण और अभ्यास के बाद टीम इस चुनौती के लिए तैयार हुई।

तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन था रूट

स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह नया मार्ग तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन था। सीमित दृश्यता, खराब मौसम और ग्लेशियरों में छिपी खतरनाक दरारें लगातार बाधा डाल रही थीं, लेकिन युवाओं ने अपनी प्राकृतिक सहनशीलता और प्रशिक्षण के बल पर इसे पार किया।

स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच और तकनीकी कोर टीम का हिस्सा रहे टोती वेल्स ने इस उपलब्धि की अंतरराष्ट्रीय सराहना करते हुए कहा कि इन युवाओं ने, जिन्होंने कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।"

छत्तीसगढ़ के युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला अत्यंत कठिन आल्पाइन रूट
Image Source : REPORTERछत्तीसगढ़ के युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला अत्यंत कठिन आल्पाइन रूट

'छुपा रुस्तम पीक' और 'कुर्कुमा रूट' भी खोला

"विष्णु देव रूट" के अलावा इस दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इन उपलब्धियों में सबसे खास रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊंची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने 'छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया, जो भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।

जशपुर के आदिवासी युवाओं ने खोला 'विष्णु देव रूट
Image Source : REPORTERजशपुर के आदिवासी युवाओं ने खोला 'विष्णु देव रूट

एडवेंचर टूरिज़्म को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यह साबित करता है कि भारत का भविष्य गांवों से निकलकर दुनिया की ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।”

जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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