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'चाहे कुछ भी हो जाए जरूर आऊंगा', बेटी के बर्थडे से 2 दिन पहले तिरंगे में लिपटकर लौटे ASP आकाश राव, सुकमा IED ब्लास्ट में हो गए शहीद

 Published : Jun 10, 2025 09:07 am IST,  Updated : Jun 10, 2025 09:07 am IST

एसपी आकाश राव ने अपनी बेटी से वादा किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह 11 जून को घर जरूर आएंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुकमा जिले के कोंटा इलाके में नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम में हुए विस्फोट में आकाश राव गिरपुंजे शहीद हो गए।

ASP Akash - India TV Hindi
शहीद एएसपी आकाश राव अपने परिवार के साथ। Image Source : FILE PHOTO

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर आईईडी बम विस्फोट में मारे गए ASP आकाश राव गिरपुंजे ने 11 जून को अपनी छह वर्षीय बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए अपने ससुराल जाने की योजना बनाई थी। एक रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी से वादा किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह वहां रहेंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुकमा जिले के कोंटा इलाके में नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम में हुए विस्फोट में आकाश राव गिरपुंजे और दो अन्य पुलिस अधिकारी घायल हो गए। बाद में आकाश राव गिरपुंजे ने कोंटा के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।

ASP के भाई ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासी 42 वर्षीय आकाश राव गिरपुंजे पिछले वर्ष मार्च से सुकमा में एएसपी के पद पर कार्यरत थे। एएसपी के छोटे भाई आदर्श गिरपुंजे ने बताया, ''भैया पूरे विभाग में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे जो कभी पीछे नहीं हटते थे, चाहे कितना भी बड़ा खतरा क्यों न हो।’’ सोमवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे यहां मौजूद आदर्श को उनके भाई के गनमैन का फोन आया जिसने उन्होंने बम विस्फोट में आकाश राव के घायल होने की सूचना दी। तब तक आदर्श को यह एहसास नहीं था कि उसके भाई की चोटें जानलेवा होने वाली हैं। आदर्श ने बताया, ‘‘आधे घंटे बाद करीब 10 बजे मुझे फिर से गनमैन का फोन आया जिसने मुझे बताया कि सर (एएसपी) नहीं रहे और दो अन्य अधिकारी घायल हो गए हैं।’’ इस खबर से वह सदमे में आ गए लेकिन किसी तरह उन्होंने हिम्मत जुटाकर परिवार के अन्य सदस्यों को इस बारे में बताया।

11 जून को है बेटी का जन्मदिन

एएसपी की पत्नी स्नेहा अपने दो बच्चों के साथ उनकी गर्मी की छुट्टियां बिताने पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के भंडारा इलाके में अपने मायके गई थीं। घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्हें रायपुर लाया गया। आदर्श ने बताया, ‘‘मैंने भैया से आखिरी बार रविवार रात बात की थी। तब उन्होंने कहा था कि वह 11 जून को अपनी बेटी के जन्मदिन के जश्न के लिए भंडारा के पौनी गांव जा रहे हैं। वह 20 मई को अपने बेटे का जन्मदिन मनाने के लिए सिर्फ एक दिन के लिए रायपुर में घर आए थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि यह आखिरी बार होगा जब हम उन्हें जीवित देखेंगे।’’ आदर्श MBBS पूरा करने के बाद मेडिकल कोर्स में स्नातोकोत्तर की तैयारी कर रहे हैं। 

छोटा सा गैराज चलाते हैं पिता

आकाश राव गिरपुंजे एक साधारण परिवार से थे। उनके पिता गोविंद राव गिरपुंजे एक छोटा सा गैराज चलाते हैं। आकाश के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं- बेटा 7 वर्ष का और बेटी 6 वर्ष की। पांच भाई-बहनों में आकाश दूसरे नंबर के थे। आदर्श ने बताया, ‘‘भैया बचपन में सरकारी अधिकारी बनना चाहते थे। 2004 में सरकारी कॉलेज से बी. कॉम. करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के दौरान वह दिल्ली में भी रहे। उन्होंने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा चार बार पास की, लेकिन मुख्य परीक्षा पास नहीं कर सके।’’

2013 में बने थे डीएसपी

आकाश ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा 2008 पास की, जिसका परिणाम 2013 में घोषित किया गया। वह डीएसपी के रूप में चयनित हुए। आदर्श ने कहा कि उन्हें अपने भाई पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘नक्सलियों से लड़ना सिर्फ एक नौकरी नहीं है, यह धैर्य, रणनीति और अस्तित्व की परीक्षा थी। आकाश भैया खतरों को जानते थे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर क्षेत्र में 3 साल तक सेवा की, जो गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) के साथ सीमा साझा करता है। उनके नेतृत्व में पिछले एक साल के दौरान कोंटा क्षेत्र में कई नये पुलिस शिविर स्थापित किए गए थे। वह कभी पीछे नहीं हटे और हर चुनौती का सामना किया।’’

CM विष्णुदेव ने घर पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

घटना के बाद आकाश राव गिरपुंजे का पार्थिव शरीर रायपुर लाया गया और पोस्टमार्टम के लिए यहां डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। बाद में, पार्थिव शरीर को राजधानी के कुशालपुर इलाके में उनके घर ले जाया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग शहीद अधिकारी के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम गिरपुंजे के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सीएम ने कहा कि अधिकारी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और नक्सलियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। साय ने शहीद के शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और उनके प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने परिवार से कहा, ‘‘गिरपुंजे जी ने अदम्य साहस, निष्ठा और कर्तव्य के प्रति समर्पण का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। हमें उन पर गर्व है। दुख की इस घड़ी में सरकार उनके परिवार के साथ है।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)

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