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'अब यही जिंदगी है', बेल न मिलने पर टूटा उमर खालिद का दिल, दोस्त बनोज्योत्सना से और क्या कहा?

 Published : Jan 05, 2026 03:45 pm IST,  Updated : Jan 05, 2026 03:45 pm IST

दिल्ली दंगा मामले में जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद उमर खालिद ने कहा कि अब जेल ही उसकी जिंदगी है। उमर खालिद की करीबी दोस्त बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने X पर उसके साथ हुई बातचीत शेयर की है।

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बनोज्योत्सना लाहिड़ी, उमर खालिद Image Source : X- @BANOJYOTSNA/PTI

दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी। उमर खालिद और शरजील इमाम के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली दंगों में उनका रोल बाकी आरोपियों से अलग है। कोर्ट ने कहा कि अभी जो दस्तावेज हैं उसके मुताबिक दोनों का दंगों में रोल केवल स्थानीय मामले तक सीमित नहीं था बल्कि वे दंगों की साजिश और भीड़ को मोबिलाइज करने में शामिल थे।

उमर खालिद की पहली प्रतिक्रिया आई सामने

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमर खालिद ने कहा कि अब जेल ही उसकी जिंदगी है। उमर की दोस्त बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोमवार को यह जानकारी दी। बनोज्योत्सना ने बताया कि उमर मामले के अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से खुश है। बनोज्योत्सना ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “उमर ने कहा, “मैं बाकी लोगों के लिए बहुत खुश हूं, जिन्हें जमानत मिल गई! राहत महसूस हो रही है।” जवाब में मैंने कहा, “मैं कल मुलाकात के लिए आऊंगी।” उमर ने कहा, “हां, आ जाना। अब यही जिंदगी है।”

5 साल से जेल में है उमर खालिद

बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे में देरी कोई “तुरुप का इक्का” नहीं है, जो वैधानिक सुरक्षा उपायों को स्वतः ही दरकिनार कर दे। सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान लंबे समय तक जेल में रहने और संविधान के अनुच्छेद 21 की दलीलें दी गईं थी लेकिन कोर्ट ने कहा कि ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शरजील इमाम के खिलाफ पहली नजर में मामला बनता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें-

1. दिल्ली दंगों में उमर खालिद, शरजील इमाम का केंद्रीय रोल

2. साजिश, भीड़ जुटाने, भीड़ को निर्देश देने के सबूत

3. दंगे में दोनों का रोल स्थानीय मामले तक सीमित नहीं

4. एक साल के बाद जमानत के लिए दे सकते हैं अर्जी

5. ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपोजिशन में भी मायूसी नजर आ रही है। RJD प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि शरजील और उमर को भी जल्द कोर्ट से न्याय मिलेगा।

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