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लाल किला धमाका मामले में 3 और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, NIA ने किया सभी के रोल का खुलासा

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jun 27, 2026 04:05 pm IST,  Updated : Jun 27, 2026 04:06 pm IST

Red Fort Blast मामले में जांच एजेंसी NIA ने 3 और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एक फरार मुख्य साजिशकर्ता भी इनमें शामिल है। पढ़ें बम धमाके में इन तीन आरोपियों का क्या रोल था।

Red Fort blast case- India TV Hindi
लाल किला ब्लास्ट केस में 3 और आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

NIA ने नवंबर, 2025 में दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार बम धमाका मामले में 3 और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इस ब्लास्ट में 11 लोगों की जान चली गई थी। NIA ने अपने केस RC-21/2025/NIA/DLI में तुफैल अहमद भट, मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर और जमीर अहमद आहंगर को आरोपी बनाया है। ये तीनों जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। साथ ही, इस केस में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर अब 13 हो गई है, जिसमें मृत मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी का भी नाम है।

चार्जशीट में फरार मुजफ्फर पर भी हैं गंभीर आरोप

NIA के मुताबिक, फरार आरोपी मुजफ्फर अहमद एक बाल रोग विशेषज्ञ है। उसने MBBS, MD की पढ़ाई की है। मुजफ्फर अहमद, सह-आरोपी डॉ. आदिल अहमद राथर का बड़ा भाई है। मुजफ्फर अहमद, AGuH Interim नामक आतंकवादी संगठन का संस्थापक सदस्य बताया गया है। इस संगठन को अल-कायदा का एक सहयोगी संगठन कहा गया है। NIA के दावे के मुताबिक, मुजफ्फर ने डॉ. उमर, आदिल, मुफ्ती इरफान और मुजम्मिल के साथ मिलकर 10 नवंबर, 2025 को हुए कार बम धमाके की साजिश रची थी।

श्रीनगर की सीक्रेट मीटिंग में हुआ था मॉड्यूल का गठन

NIA के अनुसार, जून, 2022 में श्रीनगर के ईदगाह क्षेत्र में हुई एक सीक्रेट मीटिंग में AGuH Interim मॉड्यूल बनाया गया था। इसमें मुजफ्फर अहमद भी था। NIA का यह दावा भी है कि मुजफ्फर अहमद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में संचालित एक सीक्रेट IED निर्माण केंद्र में TATP बेस्ड विस्फोटकों के निर्माण, टेस्टिंग और उन्हें सेफ रखने में एक्टिव तौर पर शामिल था। मुजफ्फर अहमद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है और उसको पकड़ने की कोशिश जारी है।

क्या थी जमीर और तुफैल की भूमिका?

NIA के मुताबिक, जमीर AGuH Interim का एक ओवरग्राउंड वर्कर था। वह आतंकी मॉड्यूल के हैंडलरों के कनेक्ट रहता था और हथियार, गोला-बारूद व कैश पहुंचाने का काम करता था। वहीं, तुफैल अहमद भट, जिसको पहले प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ओवरग्राउंड वर्कर बताया गया है, मॉड्यूल के लिए हथियारों को सप्लाई करता था। जांच के मुताबिक, उसने एक क्रिंकोव राइफल, एक AK-47, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस कथित तौर पर 'डेड ड्रॉप' के माध्यम से हासिल कर मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी को 3 लाख रुपये में दिए थे।

किन धाराओं में हैं आरोप?

नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के NIA स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, जमीर और तुफैल पर UAPA की धाराएं 13, 18, 20, 23, 38 और 39 व BNS की धाराएं 61(2), 147, 148 और 152 के अंतर्गत आरोप लगाए गए हैं। वहीं, मुजफ्फर अहमद पर BNS की धाराएं 61(2) के साथ 103(1), 109(1), 118(1) और 118(2), Explosive Substances Act की धाराएं 3, 4 और 5, PDPP Act की धाराएं 3 और 4 के अंतर्गत भी आरोप लगाए गए हैं।

NIA ने कहा है कि जियो-लोकेशन मैपिंग, फॉरेंसिक जांच और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के विश्लेषण समेत वैज्ञानिक जांच के माध्यम से आरोपियों के बीच संबंधों का पता लगाया गया है। NIA ने बताया कि केस की जांच अभी जारी है।

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