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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई एनएमसी को इस मामले में करारी फटकार, बोली- यह बंधुआ मजदूरी जैसी

देश की सर्वोच्च अदालत ने नेशनल मेडिकल कमीशन को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने यह मुद्दी रखा था कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी पदों पर काम करने वाले डॉक्टर्स को मंथली अलाउंस नहीं दिया जा रहा है। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी से नाराजगी व्यक्त की है।

Edited By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour
Published : Oct 17, 2023 09:21 am IST, Updated : Oct 17, 2023 09:21 am IST
Supreme court,NMC- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनिंग कर रहे डॉक्टर्स के अलाउंस को लेकर एनएमसी को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर नेशनल मेडिकल काउंसिल क्या कर रहा है? बता दें कि हाल ही में देश के लगभग 70 प्रतिशत मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस ट्रेनी डॉक्टर्स को मंथली अलाउंस का भुगतान नहीं करने का तथ्य सामने आया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी को फटकारा।

सीजेआई डी.वाई.चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की बेंच ने एनएमसी से कहा, ‘‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग क्या कर रहा है? ये युवा डॉक्टर 16 से 20 घंटे काम कर रहे हैं। यह बंधुआ मजदूरी जैसी है।’’ 

नहीं कर रहे अलाउंस का भुगतान

बेंच ने आगे कहा कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, जो छात्रों को एडमिशन देते समय भारी डोनेशन या कैपिटेशन फीस लेते हैं लेकिन एमबीबीएस ट्रेनियों को अनिवार्य अलाउंस का भुगतान नहीं कर रहे हैं। फिर सुप्रीम कोर्ट एनएमसी से पूछा कि एनएमसी रेगुलेटर के रूप में क्या कर रहा है।’’ जानकारी दे दें कि एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह आरोप लगाया कि देश के 70 प्रतिशत मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस ट्रेनी को देय अनिवार्य भत्ते का भुगतान नहीं कर रहे हैं।

एनएमसी ने मांगा वक्त

एनएमसी के वकील ने जानकारी लेने और बेंच को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कुछ समय मांगा है, जिसे कोर्ट ने सहज स्वीकार कर लिया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने शहर के आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसीएमएस) की दलीलों पर गौर किया कि ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए दिल्ली में फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना नहीं की गई है। इसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में दिल्ली सरकार को एक नोटिस जारी किया।

(इनपुट- पीटीआई)

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