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NMC ने किया बड़ा खुलासा, कहा- ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों में हैं ऐसे फैकल्टी

 Published : Oct 02, 2023 12:39 pm IST,  Updated : Oct 02, 2023 12:39 pm IST

हाल ही में NMC ने 27 राज्यों में मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की है। इसके बाद एनएमसी ने कई कॉलेजों को लेकर दावा किया है कि इनके यहां मानक से कम फैकल्टी हैं और जो हैं भी वे घोस्ट फैकल्टी हैं।

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नेशनल मेडिकल कमीशन Image Source : FILE PHOTO

NMC: नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2022-23 में हुए एक मूल्यांकन में शामिल मेडिकल कॉलेजों से जुड़े एक फर्जीवाडे की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकांश कॉलेजों में रिटायर्ड फैकल्टी और वरिष्ठ निवासी पाए गए हैं। साथ ही बताया कि कोई भी संस्थान 50 प्रतिशत अटेंडेंस की आवश्यकता को पूरा ही नहीं करता है। एनएमसी ने इन कॉलेजों के कागजों में दावे को असलियत से अलग बताया है। बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के लिए अधिकृत मेडिकल एजुकेशन रेगुलरटी बॉडी, नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी मेंबर्स की कमी पाई है। एनएमसी के अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (यूजीएमईबी) ने 134 कॉलेजों पर आधारित रिपोर्ट का खुलासा किया, जिनका 2022-23 में मूल्यांकन किया गया था।

अधिकांश कॉलेजों में घोस्ट फैकल्टी

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकांश कॉलेजों में या तो घोस्ट फैकल्टी और वरिष्ठ निवासी थे, कोई भी संस्थान 50 प्रतिशत उपस्थिति की न्यूनतम जरूरत को पूरा नहीं करता है। एनएमसी ने कहा कि उसने पाया कि उनमें से कोई भी नियमित रूप से इमरजेंसी डिपार्मेंट में नहीं जाता क्योंकि इमरजेंसी मेडिकल डिपार्टमेंट में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के अलावा उनसे बातचीत करने वाला कोई नहीं है। यूजीएमईबी ने कहा, "इमरजेंसी मेडिकल डिपार्टमेंट में पोस्टिंग को छात्रों के लिए एक ब्रेक पीरियड माना जाता है।" एनएमसी ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए आवश्यकता के रूप में इमरजेंसी मेडिकल स्पेशलाइजेशन को बाहर करने से संबंधित एसोसिएशन ऑफ इमरजेंसी फिजिशियन ऑफ इंडिया (एईपीआई) द्वारा साझा की गई एक शिकायत के जवाब में यह बात कही।

जमीनी हकीकत वास्तविकता से अलग

जानकारी दे दें कि हाल ही में अधिसूचित नियम में, एनएमसी ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए इमरजेंसी डिपार्मेंट की जरूरत को बाहर कर दिया है। इससे पहले, 23 जून के अपने मसौदे में, आपातकालीन चिकित्सा विभाग उन 14 विभागों में से एक था जो नए मेडिकल कॉलेजों में ग्रेजुएशन एडमिशन के लिए होना चाहिए। 22 सितंबर को एईपीआई को अपने जवाब में, यूजीएमईबी ने कहा कि इमरजेंसी मेडिकल डिपार्मेंट्स की जमीनी हकीकत "कागज पर" दिखाई देने वाली वास्तविकता से अलग है।

27 राज्यों में किया गया मूल्यांकन

आयोग ने अपने जवाब में कहा, “इन कॉलेजों की आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति की जांच करते समय, हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि एमएसआर (न्यूनतम) 2020 के अनुसार, आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नियोजित संकाय और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों के संबंध में सभी कॉलेज 100 प्रतिशत करने में विफल रहे हैं। अधिकांश कॉलेजों में घोस्ट फैकल्टी और एसआरएस (सीनियर रेजिडेंट्स) थे या आवश्यक फैकल्टी को नियोजित ही नहीं किया था।" आयोग ने आगे कहा, "कॉलेजों को कमियों के बारे में चेतावनी देने और इन कमियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देने के बाद, कोई भी कॉलेज 50 प्रतिशत उपस्थिति की आवश्यकता को भी पूरा करने में सक्षम नहीं था। शून्य उपस्थिति अभी भी आम थी।" बोर्ड ने कहा कि एकेडमिक ईयर 2022-23 के लिए संबद्धता देने या निरंतर मान्यता देने के लिए 27 राज्यों में कुल 246 स्नातक मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन किया गया था।

इस वर्ष भी, यूजीएमईबी के अधिकारियों ने 22 अगस्त से 24 अगस्त के बीच सभी कॉलेजों के साथ बातचीत की, जिसमें कुल 768 प्रतिभागी और कुलपतियों सहित 92 विश्वविद्यालय प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिक्रिया में कहा गया कि आपातकालीन चिकित्सा विभागों सहित सभी मुद्दों पर चर्चा की गई और सभी प्रतिभागियों के अधिकांश संदेह दूर कर दिए गए।

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