मुंबई: वरिष्ठ कलाकार अनुपम खेर ने उन निर्देशकों की कड़ी आलोचना की है जो विरोध कर रहे एफटीआईआई के छात्रों का साथ देने के लिए अपने राष्ट्रीय पुरस्कार को लौटा रहे हैं। उन्होंने इसे एक प्रेरित एजेंडा बताया।
फिल्मकार दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन और आठ अन्य ने कल अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए थे। इसके पीछे उन्होंने सरकार द्वारा छात्रो के मुद्दे को सुलझाने में दिखाई गई अरूचि और देश में विमर्श पर बढ़ती असहिष्णुता को वजह बताया।
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चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर के पति अनुपम ने निर्देशकों के इस समूह को पुरस्कार वापसी गैंग करार दिया।
उन्होंने ट्वीट किया, इनमें कुछ वह संदिग्ध हैं जो कभी भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते थे। वे ही सबसे पहले पुरस्कार वापसी गैंग में शामिल हुए हैं।
उन्होंने लिखा कि इनमें से कुछ लोग वो हैं जिन्होंने कांग्रेस की सरकार आते ही मुझे सेंसर बोर्ड से बाहर निकलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने इसे राष्ट्रीय पुरस्कार के निर्णायक मंडल और दर्शकों का अपमान बताया जिन्होंने उनकी फिल्में देखीं थीं।
इन फिल्म मेकर्स ने कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध और फिल्म ऐंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) स्टूडेंट्स के समर्थन में अपने अवॉर्ड लौटाए है।
इन फिल्म मेकर्स ने एफटीआईआई स्टूडेंट्स का साथ देने की भी अपील की है। अवॉर्ड लौटाने के बाद दिबाकर बनर्जी ने कहा, ‘अवॉर्ड लौटाकर मैं सबको बताना चाहता हूं कि उन्हें स्टूडेंट्स की ओर ध्यान देना चाहिए।’ वहीं, आनंद पटवर्धन ने कहा, ‘मेरे लिए राष्ट्रीय पुरस्कार किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से ज्यादा अहम है क्योंकि यह उस संविधान द्वारा दिया जाता है, जिस पर मैं भरोसा करता हूं, लेकिन इसे वापस करना एक दुर्लभ लम्हा है जब उस संविधान की आत्मा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है।’