
'बजरंगी भाईजान' को हरी झंडी देने पर 'अपनी जान को खतरा' बताने और ट्विटर पर अपने लिए 'गद्दार' शब्द सुनने वाले आलम ने कराची से एक ईमेल साक्षात्कार में आईएएनएस को बताया, "फिल्में लोगों को करीब लाने और एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने का एक बढ़िया तरीका है। यह प्रचार और जागरूकता लाने का एक बहुत कमाल का हथियार है। जिस तरह 'बजरंगी भाईजान' और 'पीके' में किया गया, अगर उसी समझदारी से प्रयोग किया जाए, तो यह (फिल्म) दुनियाभर के लोगों को जोड़ सकती है। एक-दूसरे के प्रति एक बेहतर समझ पैदा कर सकती है, सहिष्णुता बढ़ा सकती है, दिमाग खोल सकती है और दिलों को जोड़ सकती है।"
आलम ने पूर्व में अक्षय कुमार की फिल्म 'बेबी' पर पाकिस्तान में यह कहते हुए प्रतिबंध लगाया था कि यह भ्रामक प्रचार करने वाली फिल्म है, जो मूलत: यह कह रही है कि सब मुस्लिम आतंकवादी हैं और पाकिस्तान उन्हें पाल-पोस रहा है।
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