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मुख्यधारा सिनेमा में भी प्रयोग करना संभव : मणिरत्नम

 Written By: IANS
 Published : Apr 15, 2015 07:22 pm IST,  Updated : Apr 15, 2015 07:23 pm IST

चेन्नई: प्रतिष्ठित फिल्मकार मणिरत्नम का मानना है कि मुख्यधारा की सिनेमा में नम्बरों के खेल से प्रभावित हुए बिना प्रयोग करना संभव है। मणिरत्नम इन दिनों अपनी फिल्म 'ओ कधाल कणमणि' के प्रदर्शन की तैयारी

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चेन्नई: प्रतिष्ठित फिल्मकार मणिरत्नम का मानना है कि मुख्यधारा की सिनेमा में नम्बरों के खेल से प्रभावित हुए बिना प्रयोग करना संभव है।

मणिरत्नम इन दिनों अपनी फिल्म 'ओ कधाल कणमणि' के प्रदर्शन की तैयारी में हैं।

मणिरत्नम ने आईएएनएस को बताया, "मुख्यधारा सिनेमा के अंदर मुझे लगता है कि आप प्रयोग कर सकते हैं और संवेदनशील फिल्में बना सकते हैं। चरित्रों और भावनाओं के माध्यम से किसी वास्तविक और असल कहानी को लोगों के सामने रखना संभव है, जिसे महिमामंडित करके दिखाने की जरूरत नहीं है।"

उन्होंने कहा, "एक फिल्मकार के लिए उसकी फिल्म की प्रशंसा और सराहना रुपयों से कम मायने नहीं रखती। मेरा मानना है कि फिल्म का आतंरिक मूल्य भी इसके रचयिता के लिए मायने रखता है।"

रत्नम ने कहा कि इस शुक्रवार सिनेमाघरों में आ रही उनकी फिल्म 'ओ कधाल कणमणि' भी मुख्यधारा सिनेमा में किया गया एक प्रयोग है।

उन्होंने कहा, "यह एक शहरी प्रेम कहानी है। यह कहानी जीवन और रिश्तों को हमारे नजरिए से देखने के बारे में है। कहानी की पृष्ठभूमि मुंबई है और जब आप फिल्म देखेंगे, आप समझ जाएंगे कि यह उन लोगों के बारे में है, जो अपने घरों से दूर हैं और घर के नियम कायदों से आजाद हो चुके हैं।"

मणिरत्नम ने कहा कि यह फिल्म 'अलैपायुथे' की सीक्व ल नहीं है, बल्कि मानवीय रिश्तों पर आधारित एक खूबसूरत, समकालीन फिल्म है।

मणिरत्नम 'ओ कधाल कणमणि' के जरिए रोमांस और प्रेम की शैली की फिल्मों में वापसी कर रहे हैं। रोमांटिक फिल्में बनाने के लिए वैसे तो वर्षो से उन्हें 'किंग ऑफ रोमांस' की उपाधि मिली हुई है, लेकिन उनका कहना है कि वह असल में रोमांटिक व्यक्ति नहीं हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि दर्शक मेरी फिल्मों में बस रोमांटिक हिस्से को याद रखते हैं और इसलिए उन्हें लगता है कि मैं इस शैली की फिल्में बनाने में ज्यादा सहज हूं। लेकिन मेरा मानना है कि मैं हर एक शैली के साथ असहज रहता हूं, क्योंकि हर शैली अपने आप में संघर्ष है।"

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