नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज फिर 2002 के हिट एंड रन मामले में बालीवुड अभिनेता सलमान खान को बंबई उच्च न्यायालय से मिली जमानत रद्द करने के लिये दायर याचिका पर विचार से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति एफएमआई कलीफुल्ला और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने कहा, बंबई उच्च न्यायालय के आदेश में किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
न्यायालय वकील मनोहर लाल शर्मा के माध्यम से सुशीला बाई हिम्मत राव पाटिल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि उच्च न्यायालय ने पाटिल को राहत प्रदान नहीं की जिसके बेटे रवीन्द्र पाटिल की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गयी थी। रवीन्द्र पाटिल सलमान खान का अंगरक्षक था और वह 2002 के हिट एंड रन मामले में मुख्य गवाह था।
याचिका में खान की जमानत रद्द करने के साथ ही पाटिल की मौत की परिस्थितियों की जांच का भी अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर विचार नहीं किया।
इससे पहले भी 31 अगस्त को शीर्ष अदालत ने सुशीला बाई पाटिल की इसी तरह की याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया था। सलमान खान को 6 मई को निचली अदालत ने गैर इरादतन हत्या के जुर्म में पांच साल की सजा सुनायी थी परंतु यह अभिनेता जेल जाने से बच गये क्योंकि आठ मई को उसे बंबई उच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत दे दी थी।
उच्च न्यायालय ने आठ मई को सलमान खान की सजा निलंबित करते हुये दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने की अवधि के दौरान उसे जमानत दे दी थी।