
कमर्शियल सिनेमा और मेनस्ट्रीम सिनेमा को लेकर अक्सर खींचातानी होती रहती है, लेकिन मनोज मानते हैं कि सिनेमाघरों में दोनों तरह के सिनेमा की जगह होनी चाहिए। हर तरह की फिल्में बननी चाहिए और वितरक की नजर में और निर्माता की नजर में हर तरह की फिल्मों का स्थान होना चाहिए। मनोज 2 राष्ट्रीय पुरस्कार और तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुके हैं। साथ ही उन्हें अपने किरदारों के लिए आलोचकों की काफी सराहना भी मिलती रही है। उन्हें क्या अधिक प्रेरित करता है, पुरस्कार या प्रशंसा?
वह कहते हैं, "मुझे लगता है कि बहुत बार तो आलोचक भी मेरा समर्थन नहीं करते। मुझे सबसे अधिक समर्थन दर्शकों और निर्देशकों से मिला है। मैं 23 साल इस उद्योग में अपनी जगह बनाए रख पाया, यह इस बात को साबित करता है कि आप लगन से काम करते रहिए तो आपको दर्शकों का भी समर्थन मिल जाता है और आपको बहुत से निर्देशक भी मिल जाते हैं, जो आप पर विश्वास करते हैं।"
मनोज कहते हैं, "आप जब काम कर रहे होते हैं तो अवॉर्ड के लिए काम नहीं कर रहे होते, जब आप शॉट देते हैं तो आपके मन में राष्ट्रीय पुरस्कार या किसी अन्य पुरस्कार की छवि नहीं होती।" मनोज अपने करियर में विविध प्रकार के किरदार निभा चुके हैं, लेकिन क्या कोई ऐसा किरदार है, जिसे निभाने की इच्छा उनके मन में है, यह पूछने पर उन्होंने कहा, "मैं कभी किसी ड्रीम रोल के बारे में नहीं सोचता। मेरे सामने जो भी किरदार आता है, मैं उसी में डूब जाता हूं और वही उस समय मेरा ड्रीमरोल होता है"
'नाम शबाना' के बाद अब मनोज 'सरकार 3', 'लव सोनिया' और 'मिसिंग' में नजर आएंगे। उम्मीद है कि दर्शकों को मनोज की आने वाली फिल्मों में भी उनकी अदाकारी का एक नया आयाम देखने को मिलेगा।