कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अभिनेता मोहनलाल के पास मौजूद हाथीदांत की वस्तुओं के लिए वन विभाग द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र अमान्य और कानूनी रूप से अप्रवर्तनीय हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार अभिनेता को हाथीदांत की वस्तुएं रखने की अनुमति देना चाहती है, तो वह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 40(4) के तहत एक नई अधिसूचना जारी कर सकती है। यह फैसला एलूर, कोच्चि निवासी पॉलोज के ए द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें अधिनियम की धारा 40(4) के तहत जारी राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मोहनलाल को मुख्य वन्यजीव वार्डन के समक्ष दो जोड़ी हाथीदांत और 13 हाथीदांत कलाकृतियों की घोषणा करने और बाद में अधिनियम की धारा 42 के तहत स्वामित्व प्रमाण पत्र प्राप्त करने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वन विभाग ने प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे, जबकि हाथीदांत से संबंधित आपराधिक कार्यवाही पेरुंबवूर स्थित न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट न्यायालय में पहले से ही लंबित थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायालय ने कहा कि सरकार ने मोहनलाल को हाथीदांत से संबंधित वस्तुओं की घोषणा करने के लिए अधिसूचनाएं जारी की थीं और अभिनेता ने उनका पालन भी किया था, लेकिन मुख्य प्रश्न यह था कि क्या वे अधिसूचनाएं वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करती थीं। पीठ ने बताया कि राज्य ने स्वीकार किया है कि अधिसूचनाएं आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नहीं की गई थीं, जो अधिनियम के तहत एक अनिवार्य कदम है। सरकार का यह तर्क न्यायालय ने खारिज कर दिया कि अन्य माध्यमों से प्रचार पर्याप्त है। पीठ ने कहा, ‘हम राज्य सरकार के उक्त तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते।’ उसने कहा, ‘धारा 40(4) के प्रावधान विशेष प्रावधान हैं जो राज्य सरकार को पशु वस्तुओं या ट्रॉफियों के अवैध कब्जे वाले व्यक्तियों को छूट प्रदान करने का अधिकार देते हैं। इस शक्ति का प्रयोग अधिनियम के तहत निर्धारित तरीके से सख्ती से किया जाना चाहिए।’ अदालत ने कहा कि अधिसूचना को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित न करने से आदेश अमान्य हो गए। अदालत ने कहा, ‘जब किसी वैधानिक शक्ति का प्रयोग अधिनियम के तहत निर्धारित तरीके से नहीं किया जाता है, तो उस शक्ति का प्रयोग हुआ ही नहीं माना जा सकता।’
ये भी पढ़ें- 61 बार एक ही किरदार निभाने वाला एक्टर, जो था कश्मीरी पंडित, स्टेशन पर उतरते ही पड़ी थी चप्पल
संपादक की पसंद