अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड की शुरुआत अनुपमा के अपने मायके लौटने से होगी। जैसे ही वह अपने मायके में कदम रखती है, भावनाओं का एक सैलाब उसे घेर लेता है। उसके भाई भावेश और उसकी मां की यादें उसके मन में उमड़ पड़ती हैं और उसे ऐसा महसूस होता है मानो उसकी मां हर समय उसके आने का ही इंतजार कर रही थी। खुश होकर, बांकू पूछता है कि यह किसका घर है। अनुपमा बताती है कि यह घर असल में उसके भाई का था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे इसे बेचना पड़ा। वह आगे बताती है कि जिस पड़ोसी ने इसे खरीदा था। उसने उन्हें बड़ी मेहरबानी से यह इजाजत दी है कि वे जब चाहें यहां आ सकते हैं। जैसे ही अनुपमा दरवाजा खोलती है, वह अपनी मां की यादों में पूरी तरह डूब जाती है।
पराग ने ख्याति को दी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
इसी बीच, राही देखती है कि ख्याति कुछ अजीब सा बर्ताव कर रही है और उसे लगता है कि पराग का लंबे समय से इंतजार करना उसकी मानसिक हालत पर बुरा असर डाल रहा है। ख्याति बताती है कि वह पराग के लौटने की तैयारियां कर रही है। राही को बेचैनी होने लगती है और वह ख्याति से ऐसा करने से मना करती है। यह मानते हुए कि उसका यह बर्ताव उसे और भी ज्यादा परेशान कर रहा है। पराग के 'पावर ऑफ अटॉर्नी' के बाद बड़ा तमाशा होने वाला है। राही उसे हिम्मत न हारने और उम्मीद बनाए रखने के लिए कहती है, लेकिन ख्याति, राही से कहती है कि अब वह उसे और दिलासा न दे। वह सवाल करती है कि पराग ने उसे ऐसी जिम्मेदारी क्यों दी, जबकि उसे पता था कि इससे वसुंधरा को दुख होगा।
राही की तुलना अनुपमा से करेगी वसुंधरा
राही उसे समझाने की कोशिश करती है कि पराग को शायद वह सबसे ज्यादा काबिल लगी होगी। तभी वसुंधरा वहां आती है और राही पर आरोप लगाती है कि उसने पराग को ये फैसला लेने के लिए कहा था। राही इससे इनकार करती है और कहती है। इसमें उसका कोई हाथ नहीं है, जबकि ख्याति मानती है कि वह तो यह जिम्मेदारी चाहती भी नहीं थी। वसुंधरा उनकी बात पर यकीन करने से मना कर देती है और ख्याति की आलोचना करती है कि वह सिर्फ दिखावा कर रही है। वह राही से भी अपनी निराशा जाहिर करती है। उसकी तुलना अनुपमा से करती है और उसे एक चालाक औरत कहती है।
अनुपमा ने खोला अतीत का दरवाजा
दूसरी तरफ, अनुपमा, दिग्विजय, बांकू और जया को बताती है कि उसने अपनी जिंदगी में कितनी ही बार मुश्किलों का सामना किया है और हर बार उसकी मां सबसे बड़े सहारे के तौर पर उसके साथ खड़ी रही। जया उनके रहने को लेकर एक व्यावहारिक चिंता जाहिर करती है। यह सोचते हुए कि अगर दिग्विजय और बांकू इस घर में रहने आ जाएंगे तो वे लोग कहां रहेंगे। अनुपमा उसे भरोसा दिलाती है कि वे सब मिलकर कोई न कोई इंतजाम कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने एक बार गोवा में किया था।
अनुपमा और श्रुति की जंग शुरू
श्रुति से आमने-सामने होने पर अनुपमा हैरान रह जाती है। वह श्रुति से कहती है कि वह जब चाहे राही से मिल सकती है, क्योंकि राही के पास पहले से ही उसकी मां है। श्रुति तीखे अंदाज में जवाब देती है कि अनुपमा तो सिर्फ नाम की मां है और राही की तकलीफों के लिए उसी को जिम्मेदार ठहराती है।
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