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Explainer: BRICS को लेकर इतने परेशान क्यों हैं ट्रंप? जानें, अमेरिकी राष्ट्रपति को किस बात का डर

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 08, 2025 01:58 pm IST,  Updated : Jul 08, 2025 02:04 pm IST

BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत और डॉलर की बादशाहत को चुनौती ट्रंप की चिंता का मुख्य कारण है। ट्रंप ने BRICS समर्थक देशों को टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार और कूटनीति में तनाव बढ़ सकता है।

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डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से साफ है कि वह BRICS को खतरे के रूप में देख रहे हैं। Image Source : INDIA TV

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों को लेकर लगातार तीखी बयानबाजी कर रहे है। उन्होंने BRICS के 'एंटी-अमेरिकन' नीतियों का समर्थन करने वाले देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इसके अलावा, उन्होंने पहले भी BRICS देशों को चेतावनी दी थी कि अगर वे अमेरिकी डॉलर को वैश्विक व्यापार से हटाने की कोशिश करेंगे तो उन्हें 100% तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ट्रंप इतने परेशान क्यों हैं? BRICS से उन्हें क्या डर है? आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

BRICS क्या है और क्यों है खास?

BRICS एक आर्थिक समूह है, जिसमें दुनिया के 5 महत्वपूर्ण देश शामिल हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। हाल ही में इस ग्रुप में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हुए हैं। यह समूह 2009 में शुरू हुआ था और अब यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम किरदार निभा रहा है। BRICS देशों की आबादी दुनिया की 45% है और ये वैश्विक GDP (GDP) का 35% से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं।

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Image Source : X.COM/LULAOFICIALBRICS का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है।

BRICS का मकसद है कि ये देश मिलकर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करें और पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम करें। यह ग्रुप एक ऐसी दुनिया चाहता है जहां आर्थिक फैसले ज्यादा समावेशी हों और सिर्फ कुछ शक्तिशाली देशों के हाथ में न रहें।

ट्रंप की परेशानी का असली कारण

ट्रंप की परेशानी की जड़ में BRICS की बढ़ती ताकत और उसकी कुछ नीतियां हैं, जो अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक हितों को चुनौती दे सकती हैं। इसे हम 4 पॉइंट्स में समझ सकते हैं:

1: डॉलर की बादशाहत को खतरा

अमेरिकी डॉलर लंबे समय से वैश्विक व्यापार की जान है। दुनिया का ज्यादातर व्यापार, तेल की खरीद-बिक्री और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन डॉलर में होता है। लेकिन BRICS देश, खासकर रूस और चीन, डॉलर की इस एकछत्र सत्ता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले साल रूस ने BRICS समिट में सुझाव दिया था कि वैश्विक वित्त में डॉलर की भूमिका को 'पुनर्मूल्यांकन' किया जाए। इसके अलावा, BRICS देश अपनी मुद्राओं (जैसे रुपये, युआन, या रूबल) में व्यापार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो। 

ट्रंप को डर सता रहा है कि अगर डॉलर की मांग कम हुई, तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। डॉलर की ताकत अमेरिका को सस्ते में कर्ज लेने और वैश्विक बाजारों पर कंट्रोल रखने की ताकत देती है। BRICS की यह कोशिश अमेरिका की इस ताकत को कमजोर कर सकती है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर BRICS देश डॉलर को हटाने की कोशिश करेंगे, तो वह 100% टैरिफ लगाएंगे। यह धमकी उनकी चिंता को साफ दिखाती है।

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Image Source : APअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स देशों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं।

2. ट्रंप की टैरिफ नीतियों की आलोचना

हाल ही में रियो डी जनेरियो में हुए BRICS समिट में, इस गुट ने अमेरिका का नाम लिए बिना ट्रंप की टैरिफ नीतियों की आलोचना की। समिट में जारी बयान में कहा गया कि 'एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध' वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ये विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ हैं। ट्रंप ने इसे 'एंटी-अमेरिकन' नीति करार दिया और कहा कि जो देश BRICS की इन नीतियों का समर्थन करेंगे, उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'कोई भी देश जो BRICS की एंटी-अमेरिकन नीतियों के साथ जाएगा, उसे 10% अतिरिक्त टैरिफ देना होगा। कोई अपवाद नहीं होगा।' ट्रंप को लगता है कि BRICS का यह बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के खिलाफ है, जिसके तहत वे अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

3. BRICS का दुनिया में बढ़ता प्रभाव

BRICS अब सिर्फ 5 देशों का समूह नहीं रहा। नए सदस्यों के जुड़ने से यह और ताकतवर हो गया है। यह समूह अब वैश्विक मंचों (जैसे G7 और G20) के मुकाबले एक वैकल्पिक ताकत के रूप में उभर रहा है। ट्रंप को लगता है कि BRICS एक ऐसा गठजोड़ बन सकता है जो अमेरिका के वैश्विक दबदबे को चुनौती दे। खासकर रूस और चीन जैसे देश, जो अमेरिका के साथ तनावपूर्ण रिश्ते रखते हैं, इस समूह के जरिए अपनी ताकत बढ़ा सकते हैं।

वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा, 'दुनिया को कोई शाहंशाह नहीं चाहिए जो इंटरनेट पर धमकियां दे।' उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और इस नई दुनिया में कोई भी देश शहंशाहों को पसंद नहीं करता है। लूला का यह बयान दिखाता है कि BRICS देश ट्रंप की धमकियों से डरने के मूड में नहीं हैं।

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Image Source : X.COM/LULAOFICIALBRICS देशों ने ट्रंप के बयानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

4. ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापार युद्ध

ट्रंप ने अप्रैल 2025 में लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए टाल दिया गया। अब 9 जुलाई की डेडलाइन नजदीक है, जिसमें ट्रंप ने कहा है कि वह कई देशों को टैरिफ की दरें बताने वाले लेटर भेजेंगे। BRICS देशों ने इन टैरिफ को 'अवैध और मनमाना' बताया है, जो वैश्विक सप्लाई चेन को बिगाड़ सकता है। 

ट्रंप को डर है कि अगर BRICS देश एकजुट होकर अमेरिका के टैरिफ का जवाब देते हैं, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। खासकर भारत और चीन जैसे देश, जो अमेरिका के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, अगर जवाबी टैरिफ लगाएं, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

सावधानी से कदम रख रहा है भारत

भारत BRICS का एक अहम सदस्य है, लेकिन वह इस समूह में सावधानी से कदम रख रहा है। भारत डॉलर के अलावा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि यह नीति चीन के पक्ष में ज्यादा न जाए। भारत के लिए BRICS अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करने का एक मौका है, लेकिन वह अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को भी संतुलित रखना चाहता है। भारत ने शुरू से ही यही नीति अपनाई है और अभी भी अपनी नीति पर कायम है। शायद यही वजह है कि ट्रंप ने भारत को लेकर नरम रुख अपनाया है और जवाबी टैरिफ लगाने के फैसले को 1 अगस्त तक टाल दिया है।

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Image Source : X.COM/NARENDRAMODIप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा।

क्या होने वाला है इस टकराव का भविष्य?

इस तरह देखा जाए तो ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता यह है कि BRICS का बढ़ता प्रभाव और उसकी नीतियां अमेरिका की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को कम कर सकती हैं। वह चाहते हैं कि BRICS देश उनकी शर्तों पर चलें, वरना आर्थिक सजा भुगतने को तैयार रहें। दूसरी तरफ, BRICS देश अपने बयानों में साफ कर रहे हैं कि वे किसी देश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि एक निष्पक्ष और सहयोगी वैश्विक अर्थव्यवस्था चाहते हैं। यह तनाव आगे क्या रंग लाएगा, यह 9 जुलाई की डेडलाइन और ट्रंप के अगले कदमों पर निर्भर करता है। लेकिन इतना साफ है कि BRICS और अमेरिका के बीच यह आर्थिक जंग वैश्विक व्यापार और कूटनीति को नई दिशा दे सकती है।

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