1. Hindi News
  2. Explainers
  3. Explainer: फ्रांस ने अमेरिका में रखा 129 टन सोना निकाला, जानें यूरोपीय देश का ये कदम इतना महत्वपूर्ण क्यों है

Explainer: फ्रांस ने अमेरिका में रखा 129 टन सोना निकाला, जानें यूरोपीय देश का ये कदम इतना महत्वपूर्ण क्यों है

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Apr 07, 2026 05:51 pm IST,  Updated : Apr 07, 2026 05:51 pm IST

पुराने या गैर-मानक सोने को भौतिक रूप से भेजने और उसे रिफाइन करने के बजाय फ्रांस के केंद्रीय बैंक ने न्यूयॉर्क में रखे सोने को बाजार की सबसे ऊंची कीमतों पर बेचने का फैसला किया।

gold price, gold in paris, gold in us valuts, gold and america, gold of france, gold reserves, franc- India TV Hindi
'डोमिनो इफेक्ट' को शुरू कर सकती है सोने की ये वापसी Image Source : AFP

बैंक ऑफ फ्रांस (फ्रेंच में Banque de France) ने अमेरिका में रखा अपने सोने का पूरा भंडार वापस मंगा लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में इस सोने की जगह पेरिस में अपने खजानों में उतनी ही मात्रा में नया सोना रख दिया गया है। ये सोना 129 टन था, जो फ्रांस के केंद्रीय बैंक में जमा कुल सोने का लगभग 5 प्रतिशत है और इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय बैंक को €12.8 बिलियन (USD 15 बिलियन) का भारी पूंजीगत लाभ हुआ है। बताते चलें कि फ्रांस, दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार रखने वाले देशों में से एक है और 1920 के दशक के आखिर से ही इस कीमती धातु को न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में जमा करता आ रहा है।

फ्रांस ने कैसे किया इतना बड़ा ट्रांजैक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुराने या गैर-मानक सोने को भौतिक रूप से भेजने और उसे रिफाइन करने के बजाय फ्रांस के केंद्रीय बैंक ने न्यूयॉर्क में रखे उस सोने को बाजार की सबसे ऊंची कीमतों पर बेचने और उसकी जगह नए आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सोने के बिस्किट खरीदने का फैसला किया। सोने को भौतिक रूप से भेजना और उसे रिफाइन करना तार्किक रूप से जटिल और महंगा काम होता है।

फ्रांस का अब सारा सोना पेरिस में है

इसके साथ ही, फ्रांस का लगभग 2,437 टन का पूरा सोने का भंडार अब पेरिस में ही रखा है। 129 टन सोना वापस मंगाने का ये काम 26 अलग-अलग लेन-देन के जरिए पूरा किया गया।

फ्रांस ने न्यूयॉर्क के खजानों से अपना सोना क्यों वापस मंगाया?

फ्रांस ने न्यूयॉर्क के खजानों से अपना सोने का भंडार वापस मंगाने के पीछे ये वजह बताई कि दुनिया भर में डॉलर का संकट गहराता जा रहा है, जो 1971 के संकट की याद दिलाता है। ये एक रणनीतिक कदम है, जो बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच एक स्थिर रिजर्व मुद्रा के तौर पर अमेरिकी डॉलर पर घटते भरोसे को दिखाता है।

'डोमिनो इफेक्ट' को शुरू कर सकती है सोने की ये वापसी

वित्तीय विश्लेषकों का मानना ​​है कि सोने की ये वापसी एक 'डोमिनो इफेक्ट' (एक के बाद एक होने वाली घटनाओं का सिलसिला) शुरू कर सकती है, जिससे दूसरे देश भी संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों या अपनी मुद्रा का अवमूल्यन होने के खतरे से बचने के लिए अपने सोने के भंडार को सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

फ्रांस ही नहीं, कई देश भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं

हालांकि, ये कोई अप्रत्याशित बात नहीं है। ऐसा लगता है कि फ्रांस भी सोने को वापस अपने देश में लाने के बढ़ते वैश्विक चलन का ही अनुसरण कर रहा है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों और आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में, दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंक अपनी भौतिक संपत्तियों पर ज्यादा प्रत्यक्ष नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

नुकसान को मुनाफे में बदलना

हालांकि, अपने गैर-मानक सोने को बेचने का समय काफी सोच-समझकर चुना गया था। 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय बैंक को 15 बिलियन डॉलर का मुद्रा-संबंधी लाभ हुआ। इस लाभ की बदौलत केंद्रीय बैंक 2025 के वित्तीय वर्ष के लिए €8.1 बिलियन का शुद्ध मुनाफा दर्ज करने में सफल रहा। ये 2024 में दर्ज किए गए €7.7 बिलियन के शुद्ध नुकसान के मुकाबले एक जबरदस्त बदलाव को दर्शाता है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।