NEET पेपर लीक मामले की एक और आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को हिरासत में भेज दिया गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे की CBI को 14 दिन की हिरासत दे दी है। CBI ने पुणे की रहने वाली बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को बीते शनिवार को दिल्ली से अरेस्ट किया था। NEET एग्जामिनेशन प्रोसेस में मनीषा मंधारे को एक्सपर्ट के तौर पर NTA ने अपॉइंट किया था। मनीषा के पास बॉटनी और जूलॉजी के पेपर का पूरा एक्सेस था। जांच में सामने आया है कि मनीषा ने कोचिंग देने के बहाने छात्रों को पेपर नोट करवाए थे। इस आर्टिकल में जानें कि अब तक इस मामले किस-किसको गिरफ्तार किया गया है और उसकी इसमें क्या भूमिका थी।
अब तक कौन-कौन हुआ गिरफ्तार?
जान लें कि नीट पेपर लीक में मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें पीवी कुलकर्णी, मनीषा गुरुनाथ मंधारे, मनीषा वाघमारे, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल शामिल हैं। सबसे ज्यादा 5 आरोपी महाराष्ट्र से हैं। तीन राजस्थान और एक आरोपी हरियाणा का है।
NEET पेपर लीक कांड में कौन-कौन हैं मेन कैरेटक्टर?
नीट का एग्जाम देने वाले 22 लाख बच्चे अगर आज तनाव में हैं तो इसकी वजह ये तीनों मेन कैरेक्टर पीवी कुलकर्णी, मनीषा मंधारे और मनीषा वाघमारे हैं। इनमें से पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने पेपर लीक कराने का काम किया, जबकि मनीषा वाघमारे ने नीट के पेपर को स्टूडेंट तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
मास्टरमाइंड मनीषा मंधारे की कुंडली
पुणे की रहने वाली मनीषा गुरुनाथ मंधारे पेशे से एक सीनियर बॉटनी टीचर हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि मनीषा NTA की तरफ से नीट एग्जाम 2026 में एक एक्सपर्ट के तौर पर आधिकारिक रूप से शामिल थीं। NTA एक्सपर्ट पैनल में होने की वजह से बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी और पूरी पहुंच थी। 360 नंबर के क्वेश्चन तक सीधी पहुंच होने का फायदा उठाते हुए मनीषा ने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और पेपर लीक सिंडिकेट की एक बेहद अहम मोहरा बन गईं।
जांच में सामने आया है कि मनीषा मंधारे ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही पेपर लीक की साजिश रची। परीक्षा, 3 मई को होनी थी। ऐसे में अप्रैल के आखिरी हफ्ते में मनीषा मंधारे ने मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर नीट की तैयारी कर रहे छात्रों को पुणे स्थित अपने घर बुलाया। इनके लिए स्पेशल कोचिंग क्लासेज चलाईं। इन सीक्रेट क्लासेस में उसने छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के अहम सवाल बताए। उनकी नोटबुक में लिखवाए और किताबों में मार्क भी करवाए। 3 मई को जब NEET एग्जाम हुआ तो मनीषा मंधारे के रटाए गए ज्यादातर सवाल हुबहू पेपर में छपे थे। सीबीआई के मुताबिक, छात्रों को इन स्पेशल क्लासेस में बुलाने और परीक्षा में आने वाले सवाल पहले से बताने के एवज में लाखों रुपये वसूले गए।
मास्टरमाइंट कुलकर्णी के कारनामे
पीवी कुलकर्णी दयानंद कॉलेज में केमिस्ट्री लेक्चरर थे। 4 साल पहले रिटायर हो गए थे, जिसके बाद वो लातूर के कई कोचिंग क्लासेज में केमिस्ट्री पढ़ाने लगे थे। केमिस्ट्री टीचर होने की वजह से NTA ने उन्हें NEET एक्जाम में एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया था। पेपर सेट करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। कुलकर्णी को भी अप्रैल के आखिरी हफ्ते में केमिस्ट्री के फाइनल पेपर के बारे में पता चल गया था। क्वेचन पता चलते ही कुलकर्णी ने अपने नेटवर्क के जरिए कुछ छात्रों को इकट्ठा किया। इस काम में उसकी मदद मनीषा वाघमारे ने की। कुलकर्णी ने छात्रों के लिए अपने घर पर खास सीक्रेट कोचिंग क्लास चलाई। इन क्लासेज में वो सवाल, उनके ऑप्शन और सही जवाब बोल-बोलकर छात्रों को लिखवाता था।
मनीष वाघमारे का क्या था रोल?
CBI के मुताबिक, इस पूरे रैकेट में मनीष वाघमारे के अलावा कई और बिचौलिए भी शामिल थे, जो छात्रों को तलाशते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। लेकिन सबसे अहम रोल मनीषा वाघमारे का था। मनीषा वाघमारे 2024 से ही नीट पेपर लीक कराने वाले के संपर्क में थी। दरअसल, मनीषा वाघमारे पेशे से एक ब्यूटीशियन हैं, लेकिन उनके पति डेंटिस्ट हैं और पुणे में उनका क्लिनिक है। इसी क्लिनिक की आड़ में मनीषा वाघमारे मेडिकल की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स के लिए काउंसिलिंग सेंटर चलाती थी। काउंसलिंग सेंटर की वजह से उसकी छात्रों और उनके अभिभावकों तक सीधी पहुंच थी।
महाराष्ट्र से राजस्थान तक कैसे बेचा गया पेपर?
यही वजह है कि जब पीवी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने पेपर लीक के बाद छात्रों को पेपर बेचने के लिए उससे संपर्क किया तो मनीष वाघमारे ने तुरंत स्टूडेंट्स को इससे जोड़ लिया। सीबीआई को मनीषा वाघमारे और इस केस के एक अन्य मुख्य आरोपी धनंजय लोखंडे के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से बेहद पुख्ता सबूत मिले हैं। 3 मई यानी नीट एक्जाम के दिन वो दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे।
बैंक खातों में अचानक मोटी रकम आने से बढ़ा शक
हालांकि, ये संपर्क उस दौरान और भी बढ़ गया था जब एक अन्य आरोपी खैरनार ने यश यादव नाम के छात्र को नीट का गेस पेपर यानी लीक पेपर मुहैया कराया था, जिसे बाद में राजस्थान में बिवाल परिवार के सदस्यों के साथ साझा किया गया था। इस पूरी चेन में मनीषा वाघमारे की भूमिका बेहद अहम थी। नीट परीक्षा के ठीक पहले और बाद में उसके खातों में देश के अलग-अलग हिस्सों से अचानक मोटी रकम ट्रांसफर की गई।
शुरुआती जांच में लगभग 20 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। करीब 21 ऐसे बैंक अकाउंट्स की पहचान की गई है, जो अब सीबीआई के रडार पर हैं। कार्रवाई के डर से मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण मैसेज और चैट डिलीट कर दिए थे। हालांकि, सीबीआई ने मुस्तैदी दिखाते हुए मनीषा और अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और उन्हें डेटा रिकवरी के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया है। सीबीआई अब उन बिचौलियों की भी तलाश कर रही है जो पीवी कुलकर्णी के कॉन्टैक्ट में थे।
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