Fact Check: नमाज पढ़ने के बाद वापस आ गई आंखों की रोशनी? जानें क्या है वायरल VIDEO का सच
Fact Check: नमाज पढ़ने के बाद वापस आ गई आंखों की रोशनी? जानें क्या है वायरल VIDEO का सच
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति खुशी से झूमता नजर आ रहा है। वीडियो के वॉयस ओवर में दावा किया गया है कि यह शख्स अंधा था और मक्का स्थित हरम शरीफ में नमाज अदा करने के बाद उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई।
Edited By: Khushbu Rawal@khushburawal2 Published : Jun 05, 2025 01:19 pm IST, Updated : Jun 05, 2025 01:19 pm IST
सोशल मीडिया और AI के दौर में हर दिन कई फेक न्यूज और फेक वीडियो वायरल होते रहते हैं। इन्हीं फेक न्यूज से आपको सावधान करने के लिए हम लेकर आते हैं फैक्ट चेक। फेक न्यूज का ताजा मामला एक अंधे शख्स की आंखों की रोशनी वापस आने के दावे से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति खुशी से झूमता नजर आ रहा है। वीडियो के वॉयस ओवर में दावा किया गया है कि यह शख्स अंधा था और मक्का स्थित हरम शरीफ में नमाज अदा करने के बाद उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई। इसी खुशी में उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
हालांकि, फैक्ट चेक की जांच में वायरल दावा फर्जी साबित हुआ। हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह घटना साल 2016 में मक्का में हुई थी, लेकिन यूजर उस पुराने वीडियो को हाल का बताकर शेयर कर रहे हैं। उस समय पुलिस की जांच में पता चला था कि यह शख्स अंधा नहीं था, बल्कि उसने चोरी की नीयत से झूठ बोला था।
क्या हो रहा है वायरल?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक यूजर ने 28 मई 2025 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “मक्का में हुआ अल्लाह का बड़ा करिश्मा अल्लाह की कुदरत का करिश्मा।” वॉयस ओवर में दावा किया गया है कि यह शख्स मिस्र का रहने वाला है और अंधा था। मक्का स्थित हरम शरीफ में नमाज अदा करने के बाद उसकी आंखों की रोशनी लौट आई और इसी खुशी में उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
Image Source : SOCIAL MEDIA
फैक्ट चेक
वहीं, एक अन्य यूजर ने समान दावे के साथ वायरल वीडियो को शेयर किया है।
पड़ताल में क्या सामने आया?
दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया। जांच के दौरान हमें, hia.com की वेबसाइट पर 7 जून 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। यहां वायरल विजुअल मौजूद था।
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फैक्ट चेक
hia.com की रिपोर्ट के अनुसार, “सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक अंधे मिस्री व्यक्ति को ग्रैंड मस्जिद में नमाज के बाद अपनी दृष्टि वापस पाने पर खुशी के आंसू बहाते और भगवान का धन्यवाद करते दिखाया गया। वीडियो में लोग उसे गले लगाते और बधाई देते नजर आए। हालांकि, सच्चाई अलग है। सऊदी पुलिस ने इस व्यक्ति को पिकपॉकेटिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि यह वीडियो नाटक था और उसने लोगों की भावनाओं का गलत फायदा उठाया।”
पड़ताल के अगले चरण में हमें barlamane.com वेबसाइट पर 6 जून 2016 को इसी तरह के विजुअल और दावे के साथ एक और रिपोर्ट मिली।
Image Source : FILE PHOTO
फैक्ट चेक
Fact Check में क्या निकला?
वायरल दावे को लेकर किए गए फैक्ट चेक में सामने आया है कि यह घटना साल 2016 में मक्का में हुई थी, लेकिन यूजर उस पुराने वीडियो को हाल का बताकर शेयर कर रहे हैं। उस समय पुलिस की जांच में पता चला था कि यह शख्स अंधा नहीं था, बल्कि उसने चोरी की नीयत से झूठ बोला था। इसे फर्जी दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। लोगों को ऐसी किसी भी पोस्ट से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। (इनपुट: भाषा)
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