आज से सावन का पहला सोमवार शुरू हो गया है। इस पावन महीने में भगवान शिव की आराधना की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त इस पवित्र महीने में माता पार्वती और महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं, उन पर भोले बाबा की कृपा हमेशा बनी रहती है। 3 अगस्त को पूर्णिमा के दिन सावन का समापन होगा। हर साल मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी होती थी, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से बहुत कुछ बदल गया है। इसलिए आप घर बैठे सावन के पहले सोमवार के शुभ अवसर पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करिए, जो देश के कोने-कोने में प्रतिष्ठित हैं।
पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ है, जो गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।
दूसरा ज्योतिर्लिंग श्री शैल मल्लिकार्जुन है, जो मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर प्रतिष्ठित है।
तीसरा ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर है, जो उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित कहते हैं। इस जगह पर भगवान शिव ने दैत्यों का नाश किया था।
चौथा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर है, जो मध्यप्रदेश के नर्मदा तट स्थित है। इसको लेकर मान्यता है कि पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर शिव वरदान देने हुए प्रकट हुए थे, जिसके बाद यहां ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ।
पांचवां ज्योतिर्लिंग नागेश्वर है, जो गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित है।
छठवां ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ धाम है। जिसे वैजनाध धाम से भी जाना जाता है। यह झारखंड के देवोघर पर स्थापित है।
सातवां ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर है, जो महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित है।
आठवां त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग है जो नासिक से 25 किलोमीटर दूर त्र्यम्बकेश्वर में स्थापित है।
नवां ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर है, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के पास वेसल गांव में स्थापित है।
दसवां ज्योतिर्लिंग केदारनाथ है, जो उत्तराखंड में स्थित है।
ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ है, जो बनारस में दशाश्वमेध घाट के पास स्थापित है।
बारहवां ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम है, जो त्रिचनापल्ली समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित है।