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भोलेनाथ की नगरी काशी में घूमने के लिए इन जगहों पर लगता है लोगों का खूब तांता, जानें कहां कहां घूम सकते हैं?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Feb 25, 2025 01:10 pm IST,  Updated : Feb 25, 2025 01:18 pm IST
वाराणसी, जिसे काशी और बनारस भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के लोगों के लिए के महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यह शहर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वांचल क्षेत्र में गंगा नदी के तट पर स्थित है। भारत की संस्कृति को समेटे इस शहर में हजारों लाखों पर्यटक हर साल यहां घूमने आते हैं। काशी नगरी को भगवान भोले का स्थल भी कहा जाता है। 26 फरवरी को शिवरात्रि का पर्व है। ऐसे में इस मौके पर यहाँ श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगने वाली है। अगर आप भी काशी जाने का मन बना चुके हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं आप बनारस में कहां कहां घूम सकते हैं?
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वाराणसी, जिसे काशी और बनारस भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के लोगों के लिए के महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यह शहर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वांचल क्षेत्र में गंगा नदी के तट पर स्थित है। भारत की संस्कृति को समेटे इस शहर में हजारों लाखों पर्यटक हर साल यहां घूमने आते हैं। काशी नगरी को भगवान भोले का स्थल भी कहा जाता है। 26 फरवरी को शिवरात्रि का पर्व है। ऐसे में इस मौके पर यहाँ श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगने वाली है। अगर आप भी काशी जाने का मन बना चुके हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं आप बनारस में कहां कहां घूम सकते हैं?
वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, भगवान शिव को समर्पित आस्था और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के कारण यहां साल भर लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर का स्वर्ण शिखर और गर्भगृह एक दिव्य आभा बिखेरता है। कड़ी सुरक्षा और संकरी गलियों के बीच, मंदिर तक की यात्रा यादगार होती है।
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वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, भगवान शिव को समर्पित आस्था और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के कारण यहां साल भर लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर का स्वर्ण शिखर और गर्भगृह एक दिव्य आभा बिखेरता है। कड़ी सुरक्षा और संकरी गलियों के बीच, मंदिर तक की यात्रा यादगार होती है।
वाराणसी का सबसे मशहूर दशाश्वमेध घाट गंगा आरती के लिए जाना जाता है। हर शाम को घाट को अग्नि-प्रज्वलित दीपों से रोशन किया जाता है, जहाँ पुजारी अनुष्ठान करते हैं जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। मंत्रों और भजनों के साथ होने वाली आरती अविस्मरणीय माहौल बनाती है।
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वाराणसी का सबसे मशहूर दशाश्वमेध घाट गंगा आरती के लिए जाना जाता है। हर शाम को घाट को अग्नि-प्रज्वलित दीपों से रोशन किया जाता है, जहाँ पुजारी अनुष्ठान करते हैं जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। मंत्रों और भजनों के साथ होने वाली आरती अविस्मरणीय माहौल बनाती है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यह न केवल एक शैक्षणिक संस्थान है, बल्कि वाराणसी में एक सांस्कृतिक स्थल भी है। पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में स्थापित, यह एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां के परिसर में भारत कला भवन संग्रहालय है, जिसमें भारतीय कला का विशाल संग्रह प्रदर्शित है।
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यह न केवल एक शैक्षणिक संस्थान है, बल्कि वाराणसी में एक सांस्कृतिक स्थल भी है। पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में स्थापित, यह एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां के परिसर में भारत कला भवन संग्रहालय है, जिसमें भारतीय कला का विशाल संग्रह प्रदर्शित है।
सारनाथ वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इस स्थल पर धामेक स्तूप, प्राचीन मठ और पुरातत्व संग्रहालय है, जिसमें बौद्ध कला का संग्रह है। अगर आपकी इतिहास में रूचि है तो इस जगह पर ज़रूर जाएं।
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सारनाथ वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इस स्थल पर धामेक स्तूप, प्राचीन मठ और पुरातत्व संग्रहालय है, जिसमें बौद्ध कला का संग्रह है। अगर आपकी इतिहास में रूचि है तो इस जगह पर ज़रूर जाएं।
वाराणसी का तिब्बती मंदिर शांति और स्थिरता का प्रतीक है। इस मंदिर की पारंपरिक तिब्बती वास्तुकला, एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति और मंत्रोच्चार और प्रार्थना की घंटियों की ध्वनि मंदिर के पवित्र वातावरण को और बढ़ा देती है।
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वाराणसी का तिब्बती मंदिर शांति और स्थिरता का प्रतीक है। इस मंदिर की पारंपरिक तिब्बती वास्तुकला, एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति और मंत्रोच्चार और प्रार्थना की घंटियों की ध्वनि मंदिर के पवित्र वातावरण को और बढ़ा देती है।
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