PHOTOS: हुमायूं की जिंदगी से जुड़ी ये 6 बातें जानते हैं आप? चौथे पॉइंट के बारे में तो पक्का पता नहीं होगा
PHOTOS: हुमायूं की जिंदगी से जुड़ी ये 6 बातें जानते हैं आप? चौथे पॉइंट के बारे में तो पक्का पता नहीं होगा
मुगल बादशाह हुमायूं की जिंदगी संघर्ष से भरी थी। बाबर की मौत के बाद वह बादशाह बना, लेकिन शेरशाह सूरी से हारकर 15 साल निर्वासन झेला। फारस की मदद से 1555 में उसने दिल्ली फिर जीती, लेकिन 1556 में लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर उसकी दुखद मौत हो गई।
Published : Mar 06, 2026 12:39 pm IST, Updated : Mar 06, 2026 12:40 pm IST
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दूसरे मुगल बादशाह हुमायूं की जिंदगी तमाम उतार चढ़ावों से भरी रही है। हुमायूं का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल में हुआ था। 26 दिसंबर 1530 को अपने पिता बाबर की मौत के बाद वह बादशाह बना था। हुमायूं की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। आइए, जानते हैं उसकी जिंदगी से जुड़ी 6 दिलचस्प बातें।
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1- बाबर ने अपनी जान देकर हुमायूं को बचाया: बचपन में हुमायूं बहुत बीमार पड़ गया था। उसके पिता बाबर ने दुआ मांगी कि 'अगर किसी की जान के बदले जान दी जा सकती है, तो मैं अपनी जान देकर बेटे को बचा लूं।' इसके बाद बाबर की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई, जबकि हुमायूं ठीक हो गया।
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2- शेरशाह सूरी से 2 बार बुरी तरह हार: 1539 में चौसा की लड़ाई में हुमायूं हार गया और गंगा नदी में तैरकर किसी तरह अपनी जान बचाई। फिर 1540 में कन्नौज की लड़ाई में भी उसकी बुरी हार हुई। इसके साथ ही शेरशाह सूरी हिंदुस्तान ताकतवर बादशाह बन गया।
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3- 15 साल का निर्वासन और भटकाव: हार के बाद हुमायूं सिंध, राजस्थान, अमरकोट में भटकता रहा। अमरकोट में 1542 में उसकी पत्नी हमीदा बानो बेगम ने अकबर को जन्म दिया। फिर वे ईरान पहुंचे, जहां शाह तहमास्प ने उनकी मदद की।
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4- अपने भाई कामरान से 3 बार काबुल छीना: निर्वासन में ही हुमायूं ने अपने सौतेले भाई कामरान से काबुल और कंधार पर कब्जा करने के लिए कई बार लड़ाई की। कामरान ने कई बार धोखा दिया, लेकिन हुमायूं ने आखिरकार 1550 में काबुल पर पूरा कब्जा कर लिया।
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5- दिल्ली पर हुमायूं ने दोबारा किया कब्जा: 1555 में फारसी सेना की मदद से हुमायूं ने सिरहिंद की लड़ाई में शेरशाह के बेटे सिकंदर सूरी को हराया और दिल्ली-आगरा पर दोबारा कब्जा कर लिया। ठीक 15 साल बाद वह फिर बादशाह बना!
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6- सीढ़ियों से गिरकर मौत: दोबारा बादशाह बनने के महज 6 महीने बाद, 27 जनवरी 1556 को हुमायूं दिल्ली के पुराने किले में अपनी लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिर गए। अजान की आवाज सुनकर वह नमाज पढ़ने के लिए हड़बड़ी में निकले थे और उनका पैर फिसल गया। महज 47 साल की उम्र में कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई।