भारत में यहां बना रंग-बिरंगा हाईवे, वजह जान आपके मुंह से पक्का निकलेगा ''वाह''!
भारत में यहां बना रंग-बिरंगा हाईवे, वजह जान आपके मुंह से पक्का निकलेगा ''वाह''!
एमपी में जबलपुर–भोपाल नेशनल हाईवे पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के पास बना पहला रेड रोड विकास और वन्यजीव संरक्षण के बैलेंस की मिसाल है। रेड टेबल-टॉप मार्किंग से सजा हाईवे तेज रफ्तार पर लगाम लगाकर जानवरों की सुरक्षा करता है।
Published : Dec 14, 2025 07:13 pm IST, Updated : Dec 14, 2025 07:13 pm IST
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मध्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और विकास का अनूठा संगम देखने को मिला। जबलपुर–भोपाल के नेशनल हाईवे पर अब गाड़ियां केवल अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचेंगी, बल्कि जंगल में रहने वाले जानवरों की सुरक्षा की कहानी भी कहेंगी। दरअसल, इन दिनों वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के पास बना देश का पहला रेड रोड या रंगीन हाईवे चर्चा में है, जो वन्यजीवों और तेज रफ्तार के बीच संतुलन कायम करने की मिसाल बन गया है।
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दरअसल, यह खास रोड जबलपुर–भोपाल NH-45 के करीब उस जगह पर बनाया गया है जो रास्ता सीधे टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। यहां नीलगाय, हिरण और अन्य जंगली जानवरों के सड़क को पार करने के दौरान अक्सर हादसे हो जाते थे। इन्हीं हादसों को रोकने और जानवरों की हिफाजत के लिए इस हाईवे को खास तरीके से डिजाइन किया गया है।
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इस रंग-बिरंगे हाईवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी लाल रंग की टेबल-टॉप मार्किंग है। करीब 2 किलोमीटर लंबे इस पार्ट में सड़क पर 5 मिलीमीटर मोटी उभरी हुई लाल पट्टियां बनी हैं, जो दूर से ही ड्राइवरों को अलर्ट कर देती हैं। जैसे ही गाड़ी नेशनल हाईवे के इस भाग में एंट्री लेती है, सड़क का लाल रंग और सतह गाड़ी चलाने वाले को स्पीड कम करने का साफ संदेश देती है।
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यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास कहा जा रहा है क्योंकि इसको भारत की पहली रेड रोड के तौर पर देखा जा रहा है। यह स्टेप महज सड़क सुरक्षा को नया आयाम नहीं देता, बल्कि यह भी साबित करता है कि मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ हो सकते हैं।
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कुल मिलाकर, एमपी में बना यह रंग-बिरंगा हाईवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि यह डेवलपमेंट की उस सोच को दिखाता है, जिसमें इंसान की स्पीड के साथ जंगल के बाशिंदों को भी पूरी परवाह की गई है।
6/7Image Source : PTI (प्रतीकात्मक फोटो)
जान लें कि जिस वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में रंगीन हाईवे बना है वह मध्य प्रदेश का एक अहम वन्यजीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व है, जो अपनी जैव विविधता, विरासत और वन्यजीनों के संरक्षण की कोशिशों के लिए जाना जाता है। इस टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल करीब 2 हजार 339 वर्ग किलोमीटर का है। यह क्षेत्र बाघों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त माना जाता है।
7/7Image Source : Pexels (सांकेतिक फोटो)
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ, चीतल, सांभर, तेंदुआ, नीलगाय, लकड़बग्घा, जंगली सूअर और सियार रहते हैं। यहां सरीसृपों और पक्षियों की भी समृद्ध प्रजातियां हैं। वनस्पति की बात करें तो यहां सागौन, तेंदू, बांस, साल और घास के विशाल मैदान हैं।