जामनगर के सरकारी डेंटल कॉलेज और अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करने वाले एक कर्मचारी द्वारा 'रोगी कल्याण समिति' के खाते से करोड़ों रुपये के गबन और धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस पूरे मामले को लेकर संस्थान के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भारी हंगामा मच गया है।
निजी बैंक खाते में ट्रांसफर की रकम
जामनगर के सरकारी डेंटल कॉलेज और अस्पताल में NHM के तहत सरकारी संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत शोभित गर्ग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उसने अलग-अलग तारीखों पर रोगी कल्याण समिति के 'सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया' खाते से चेक के माध्यम से पैसे निकाले और उन्हें अपने निजी बैंक खाते में जमा कर दिया, जिससे कुल 1,36,19,350 रुपये का गबन हुआ। इस मामले में, 'ट्यूटर क्लास-2' के पद पर कार्यरत डॉ. संजयभाई वल्लभदासभाई उमरानिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, संस्थान में प्रशासनिक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण, कई वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संविदा कर्मचारियों को सौंपी गई थीं। इनमें शोभित गर्ग को लिखित रूप में रोगी कल्याण समिति के वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी।
रोगी कल्याण समिति के फंड में हेराफेरी
पूरी शिकायत की बात करें तो, 16 मई 2026 को GG अस्पताल के डॉ. कंसगरा ने डेंटल कॉलेज के डीन को फोन किया और सूचित किया कि बैंक मैनेजर ने उन्हें बताया है कि डेंटल कॉलेज की रोगी कल्याण समिति के खाते से चेक के माध्यम से लाखों रुपये की राशि शोभित गर्ग के निजी खाते में जमा की गई है।
15 चेक के जरिए 1,36,19,350 रुपये ट्रांसफर
यह जानकारी मिलने के बाद, डीन ने समिति के सदस्यों और अन्य अधिकारियों को बुलाया और एक प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान, शोभित गर्ग कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिससे संदेह और गहरा गया। उसके बाद, जब रोगी कल्याण समिति के 'सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया' खाते का विवरण (स्टेटमेंट) जांचा गया, तो यह खुलासा हुआ कि पिछले छह महीनों के दौरान, बैंक ऑफ़ इंडिया में शोभित गर्ग के पर्सनल अकाउंट में 15 चेक के ज़रिए 1,36,19,350 रुपये ट्रांसफर किए गए। जांच के दौरान सामने आए चेक के मुताबिक, यह पता चला है कि अलग-अलग तारीखों पर 46 हजार रुपये से लेकर 28.55 लाख रुपये तक की रकम जमा की गई है। इसमें 23 मार्च को 19.45 लाख रुपये, 27 मार्च को 24.60 लाख रुपये, 30 मार्च को फिर से 24.60 लाख रुपये और 2 अप्रैल को 28.55 लाख रुपये की बड़ी रकम जमा की गई है।
पद का गलत इस्तेमाल करके सरकार के साथ विश्वासघात
इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह पूरा घोटाला गांधीनगर से मरीजों के इलाज और आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी के लिए मिली सरकारी ग्रांट की रकम में हेरफेर करके और चेक की रकम बदलकर किया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसने अपनी पद का गलत इस्तेमाल करके सरकार के साथ विश्वासघात किया। फिलहाल, पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले में आगे की जाँच कर रही है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है उस से कड़ी पूछताछ हो रही है। बताया जा रहा है कि अगर जांच के दौरान किसी और की भी मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
(रिपोर्ट- हरदीप भोगल)
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