अहमदाबाद: सरदार पटेल स्टेडियम में भाजपा के एक समारोह के दौरान गुजरात के तत्कालीन मंत्री आत्माराम पटेल की धोती खींचने के मामले में 29 साल बाद शहर की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. के. पटेल, जो गुजरात भाजपा के पहले दो लोकसभा सदस्यों में से एक थे के खिलाफ आपराधिक मामला खत्म कर दिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी वकील ने केस को बंद करने की अपील की थी क्योंकि पीड़ित और एक आरोपी की मौत सुनवाई के दौरान ही हो चुकी है। इस मामले में एक अन्य भाजपा नेता मंगलदास पटेल भी आरोपी थे। उनका निधन हो चुका है। वहीं, पीड़ित आत्माराम पटेल का भी निधन हो चुका है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला नारनपुरा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दर्ज किया गया था। उन पर 1996 में मंत्री पर कथित तौर पर हमला करने और उनकी धोती खींचने का आरोप था। मंगलदास इस दुनिया में अब नहीं है। आरोपी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के साथ मतभेद के समय शंकरसिंह वाघेला का समर्थन किया था। यह घटना भाजपा के सीनियर नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा सभा को संबोधित करने के तुरंत बाद हुई थी।
सरकारी वकील ने कोर्ट से की थी ये अपील
सरकारी वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट ने 95 वर्षीय पूर्व सांसद के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत एक आवेदन दायर किया। मामले के सह-अभियुक्त मंगलदास पटेल और गवाह (पीड़ित) आत्माराम पटेल का मुकदमे के दौरान निधन हो गया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कही ये बातें
बयानों पर सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एच.जी. पांड्या ने कहा कि यह मामला 28 साल पहले हुए एक आंतरिक राजनीतिक दल के विवाद से जुड़ा है और पीड़ित आत्मारामभाई मगनभाई पटेल का निधन हो चुका है। सरकारी वकील द्वारा मामला वापस लेने का अनुरोध नेकनीयती से किया गया प्रतीत होता है और अभियोजन वापस लेने पर पर्याप्त विचार किया गया है। इसलिए रिकॉर्ड और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए न्याय के हित में सीआरपीसी की धारा 321 के तहत अभियोजन वापस लेने की अनुमति देना उचित है।
इससे पहले, 30 जनवरी, 2018 को एक महानगरीय अदालत ने विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया और दस्करोई से भाजपा विधायक बाबू जमना पटेल सहित 41 भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के खिलाफ संबंधित आपराधिक मामला खारिज कर दिया था।