"आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं, सपने सौ बरस के है...पल की ख़बर नहीं" जी हां महाराष्ट्र के जालना में क्रिकेट मैच चल रहा था। बैटिंग कर रहे एक 30 साल के खिलाड़ी ने सिक्स मारा और लोग तालियां बजाने के लिए सीट से उठे। लेकिन वो खिलाड़ी अचानक ज़मीन पर गिर गया। उसके सीने में तेज़ दर्द उठा था। मैच खेल रहे साथियों ने उसे CPR देकर बचाने की कोशिश की लेकिन उसकी मौत हो गई। ऐसा सिर्फ ये पहला केस नहीं है। इस तरह के मामले रोज सामने आते हैं। जिसे देखकर लगता है कि ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं है। इन दिनों हार्ट अटैक के मामले इतने क़ॉमन हो गए हैं कि कभी क्रिकेट का मैदान है कभी स्कूल तो कभी कुंभ का मेला, सेकंड्स में लोगों की जान जा रही है।
सर्दी में हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट के मामले कुछ ज़्यादा ही देखने को मिलते हैं। ठंड के अलावा खराब लाइफस्टाइल, गलत आदतें और बिगड़े खानपान से लोगों का दिल कमज़ोर हो गया है और लोगों को इसकी खबर तक नहीं है। खासतौर पर युवा तो अपने दिल की सेहत पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक हार्ट अटैक के कुल मामलों में 50% लोग 50 से कम उम्र के तो 25% लोग 40 साल से कम एज के हैं।
बहुत सारे लोगों को तो ये भी नहीं पता कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क क्या है। सिंपल शब्दों में समझना है तो जब ब्लड सर्कुलेशन गड़बड़ होता है, नसों में क्लॉट की वजह से खून दिल तक नहीं पहुंच पाता तो हार्ट अटैक आता है। वहीं सडेन कार्डियक अरेस्ट की वजह होती है इर्रेगुलर हार्ट बीट और इसमें 8 मिनट के अंदर जान जा सकती है। लेकिन जब दिल मजबूत होगा तो आप हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों से बच पाएंगे। स्वामी रामदेव से जानते हैं हार्ट को कैसे मजबूत बनाएं?
हार्ट के लिए सुपरफूड
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