शरीर में पित्ताशय में पाए जाने वाले पित्त के कठोर होकर जमने को पित्ताशय की पथरी कहा जाता है, इसे कोलेलिथियसिस भी कहते हैं। ये महिलाओं में काफी आम है। पित्ताशय में पथरी का एक बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल को भी माना जाता है। रोजमर्रा की आदतें हैं जो गॉलब्लैडर में स्टोन का खतरा बढ़ा देती हैं। कुल मिलाकर मोटापा, डायबिटीज, मेटाबोलिक सिंड्रोम और असामान्य लिपिड प्रोफाइल पित्ताशय की पथरी बनने के लिए जिम्मेदार हैं। आइये जानते हैं ऐसी 5 आदतों के बारे में जो पित्ताशय की पथरी होने का खतरा कई गुना बढ़ा सकती हैं।
आदतें जिससे बढ़ता है गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा
खाना- अगर आपकी डाइट में हाई फैट, तला भुना खाना, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और कम फाइबर वाली चीजें शामिल हैं तो ये पित्ताशय की थैली में पथरी का बड़ा कारण बन सकती हैं। पित्ताशय का काम पित्त को स्टोर करना और फैट को पचाने में मदद करना है। लेकिन जब खाने में लगातार अनहेल्दी फैट बढ़ जाता और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे सेफद ब्रेड, पेस्ट्री, मैदा से बनी चीजें और मीठी चीजें शामिल होती हैं तो पित्त के संतुलन बिगड़ सकता है। कम फाइबर वाली चीजें खाने से पाचन और पित्त फ्लो में परेशानी होती है।
शराब- अगर आप ज्यादा शराब का सेवन करते हैं तो ये गॉलब्लैडर के लिए ठीक नहीं है। अत्यधिक शराब पीने से आपको खराब कैलोरी मिलती है और लीवर में फैट जमा होता है। साथ ही अग्नाशय में कैल्सीफिकेशन भी होता है। शराब डिस्लिपिडेमिया और पेट में सूजन भी पैदा करती है। ये सभी कारक मिलकर पित्ताशय की पथरी पैदा कर सकते हैं।
तेजी से वजन घटाना और क्रैश डाइटिंग- मोटापा पित्ताशय की पथरी का एक जाना-माना जोखिम कारक है, लेकिन बहुत जल्दी वजन कम करने से भी पथरी बन सकती है। खासतौर से जब आप कम समय में बहुत ज्यादा वजन कम करते हैं, तो आपका लिवर पित्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल स्रावित करता है।
इनएक्टिव लाइफस्टाइल- जो लोग किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं उन्हें पित्ताशय की पथरी से जुड़ा खतरा ज्यादा रहता है। यह आपके मेटाबॉलिज्म और पित्ताशय में पित्त के प्रवाह को भी धीमा कर देता है। नियमित व्यायाम स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है और समग्र पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
बिना डॉक्टर के दवाएं खाना- अगर आप बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं खाते हैं तो इससे पित्ताशय की पथरी का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर से वजन घटाने की दवाएं इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। इसके अलावा एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी, एस्ट्रोजन ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव और टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रीशन भी पित्ताशय की पथरी के खतरे को बढ़ देते हैं।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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