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खौफनाक रूप से लौट सकती हैं खसरा (Measles) जैसी पुरानी बीमारियां, WHO ने दुनिया को किया सतर्क

 Written By: Pallavi Kumari
 Published : Dec 10, 2022 03:51 pm IST,  Updated : Dec 10, 2022 03:51 pm IST

Measles: भारत में खसरा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में WHO का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसी बीमारियां लौट सकती हैं।

measles_who- India TV Hindi
measles_who Image Source : FREEPIK

कोरोना के बाद दुनियाभर में अब खसरा (Measles) जैसी पुरानी बीमारियों की बात हो रही है। स्थिति यह है कि नियमित  टीकाकरण की कमी से बच्चे खसरा जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। ये हम नहीं बल्कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है। WHO की मानें तो, आने वाले सालों में दुनियाभर में कुछ पुरानी और संक्रामक बीमारियां लौट सकती हैं। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की मानें तो, दुनियाभर में  लगभग 40 मिलियन बच्चे हैं जिन्हें खसरा जैसी पुरानी बीमारियों का टीका नहीं लगा है। इसके अलावा भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने काफी कुछ कहा है, आइए जानते हैं विस्तार से। 

खौफनाक रूप से लौट सकती हैं खसरा (Measles) जैसी पुरानी बीमारियां: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की मानें तो, खसरा एक वायरल श्वसन रोग है। ये सांस की बूंदों और एरोसोल (एयरबोर्न ट्रांसमिशन) से फैलता है। ऐसे में जब कोविड के दो सालों में बच्चे टीका लेने से रह गए हैं तो, इस स्थिति में खसरा (Measles)  जैसी बीमारी खौफनाक तरीके से फैल सकती है। सबसे ज्यादा खतरा विकासशील देशों में है जहां टीकों का उपयोग कम है और यहां खसरे से पीड़ित दस में से एक बच्चे की इससे मृत्यु हो जाती है। इसके अलावा संघर्ष क्षेत्रों और शरणार्थी आबादी जैसे क्षेत्रों में भी इसके प्रकोप की संभावना अधिक है।

कुपोषण बन सकता है एक बड़ा कारण

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि  कुपोषण के कारण भी बच्चे कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। दरअसल, कुपोषण जैसी समस्याएं गंभीर बीमारी के जोखिम को बहुत बढ़ा देती हैं और श्वसन संबंधी संक्रामक रोगों को कारण बनती हैं। विश्व स्तर पर,  5 साल से कम आयु के बच्चों में इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा है। क्योंकि इस बीमारी के बाद भी बच्चों की इम्यूनिटी को लंबे समय तक नुकसान होने की संभावना होती है। इसलिए जरूरी है कि तमाम देशों में इस बीमारी के लिए टीकाकरण को बढ़ाया जाए। इसके अलावा बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए व्यापक तौर पर कुछ बड़े कदम उठाने होंगे। ताकि, बच्चे अंदर से सेहतमंद रहें और उनकी इम्यूनिटी स्ट्रांग रहे। 

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