नई दिल्ली. उत्तराखंड के चमोली में आई भीषण आपदा के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो चुका है। ये ऑपरेशन पूरी रात चलता रहा और सूरज की पहली किरण के साथ ही इसमें और तेजी आ चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा में अबतक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में 150 से ज्यादा लोग लोग लापता हैं। तपोवन के हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट की एक टनल से अब तक 12 लोगों को निकाला जा चुका है जबकि दूसरी टनल में अब भी 30 लोग फंसे हुए हैं। आर्मी, ITBP, एसडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन रात भर जारी रहा और अब सुबह होते ही एयरफोर्स भी एक्शन में आ गई है।
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आपको बता दें कि कल सुबह साढ़े दस बजे नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया था, जिसके बाद नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस सैलाब की चपेट में दो हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट आए गए, पहला ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और दूसरा तपोवन पावर प्रोजेक्ट। भीषण तबही की वजह से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया जबकि तपोवन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में गाद, मलबा भर गया और कई लोग फंस गए। आज दिनभर इसी इन पावर प्रोजेक्ट में रेस्क्यू का काम चलेगा और जिंदा बचे लोगों को बाहर निकाला जाएगा।
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उत्तराखंड में आई आपदा के सभी लेटेस्ट अपडेट आपको हमारे इस पेज पर मिलेंगे। लगातार रिफ्रेश करते रहें।
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ग्लेशियर टूटने के बाद राहत और बचाव कार्यों का जायज़ा लेने के लिए जोशीमठ पहुंचे।
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जोशीमठ में आई आपदा में राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि क्षेत्र में खाद्य सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में लगे कार्मिकों को भी सभी आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध हो। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ मद से 20 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने उत्तराखंड के सांसदों के साथ उत्तराखंड ग्लेशियर आपदा पर राहत प्रयासों पर चर्चा की।
उत्तराखंड के चमोली ग्लेशियर हादसे के बाद से तपोवन टनल में ITBP, आर्मी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की सुंयक्त टीम राहत बचाव काम में जुटी हुई है।
बरसाती पुल बाढ़ से बह गया था, आईटीबीपी के जवानों ने उत्तराखंड में हेलिकॉप्टर के जरिए लगभग 9 गांवों के फंसे हुए लोगों को राशन के पैकेट उपलब्ध कराए।
इस वक्त हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरंग में फंसे करीब 34 लोगों को बचाना हैं। अभी हम सुरंग के अंदर 70 मीटर तक गए हैं और करीब 180 मीटर तक और जाना है। किस तरह से हम सुरंग से मलवा निकाले इसके लिए पदाधिकारियों के साथ बातचीत की गई है: केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह, उत्तराखंड त्रासदी पर
हमने 18 शव बरामद किए हैं और लापता लोगों की संख्या 202 है। हमने टनल में 80 मीटर तक मलबा हटा दिया है, आगे हमारी मशीनें लगी हुई हैं और हमें शाम तक कुछ सफलता मिलने की उम्मीद है: अशोक कुमार, उत्तराखंड के डीजीपी
ग्लेशियर टूटने से हुए नुकसान को हम अब कम करने का प्रयास कर रहे हैं। बहुत सारे लोग इसमें लापता हुए हैं। NTPC डैम में काम कर रहे लोग लापता हुए हैं और डैम को भारी नुकसान हुआ है: मनोज रावत, ADG
उत्तराखंड: चमोली ज़िले के तपोवन में टनल में राहत और बचाव कार्य अभी चल रहा है। आईटीबीपी के जवान बचाव कार्य में स्निफर डॉग की मदद ले रहे हैं।
अभी हमारा पूरा ध्यान 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के अंदर फंसे हुए लोगों को बचाने पर है। सभी टीमें उसी काम में लगी हुई हैं। सुरंग में 1 किलोमीटर से ज्यादा तक की मिट्टी को हटा दिया गया है। जल्द ही हम उस स्थान तक पहुंच जाएंगे जहां पर लोग जीवित हैं: एस.एन. प्रधान, DG NDRF #Uttarakhand
पुल टूटने से जो 13 गांव अलग हो गए हैं उनके लिए बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है और उन्हें राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। हमारी मेडिकल टीमें भी पहुंच गई हैं। जो लोग अलग-अलग पहाड़ों पर फंसे हुए हैं उनके लिए भी बचाव कार्य चल रहा है: स्वाति भदौरिया चमोली की ज़िलाधिकारी
तपोवन प्रोजेक्ट का काम चल रहा था, इसमें बड़ी संख्या में श्रमिक काम कर रहे थे। अब तक 11 शव बरामद हुए हैं और 203 लोग लापता हैं। मैंने अपने मुख्य सचिव को बोला है कि यहां मौजूद ISRO के वैज्ञानिकों की मदद से ग्लेशियर टूटने के कारणों को ढूंढा जाए ताकि भविष्य में हम एहतियात बरत सके।- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
हमारे बहादुर जवान रात भर के बचाव कार्य के पश्चात सुरंग के मुहाने तक पहुँच गए हैं। बचाव कार्य जोरो से चल रहा है और हम और अधिक लोगों की जान बचाने की उम्मीद कर रहे हैं। दुर्भाग्य से, बचाव दलों ने अब तक 11 शव बरामद किए हैं। मेरी संवेदनाएं प्रभावित लोगों के साथ हैं: उत्तराखंड CM
ITBP देहरादून के सेक्टर हेडक्वार्टर की DIG अपर्णा कुमार ने बताया कि बड़ी टनल को 70-80 मीटर खोला गया है, जेसीबी से मलबा निकाल रहे हैं। यहां कल से 30-40 कर्मी फंसे हुए हैं। आईटीबीपी, उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना यहां संयुक्त ऑपरेशन कर रही है।
भारतीय सेना ने बताया कि इंजीनियरिंग टास्क फोर्स सहित सेना के कर्मियों के अथक प्रयासों के बाद, सुरंग का मुंह साफ किया गया। जनरेटर और सर्च लाइट लगाकर रात भर earthmovers के साथ काम जारी रखा गया। फील्ड अस्पताल घटना स्थल पर चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहा है।
देहरादून से जोशीमठ के लिए एमआई-17 और ALH हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने के साथ हवाई राहत और बचाव अभियान फिर से शुरू हुआ: भारतीय वायु सेना
ग्लेशियर टूटने से रैणी पावर प्रोजेक्ट पूरा बह गया और तपोवन भी क्षतिग्रस्त हुआ। पहले प्रोजेक्ट से 32 लोग लापता हैं और दूसरे प्रोजेक्ट से 121 लोग लापता हैं। इनमें से 10 शव बरामद हो गए हैं। तपोवन प्रोजेक्ट में दो टनल थीं, छोटी टनल से कल 12 लोगों को बचाया गया- अशोक कुमार, उत्तराखंड DGP
टनल में फंसे लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी। जेसीबी की मदद से टनल के अंदर पहुंच कर रास्ता खोलने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है एवं 14 शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किये गये हैं।
SDRF ने चमोली में तपोवन बांध के पास सुरंग पर अपना बचाव अभियान शुरू किया।
चमोली में तपोवन बांध के पास तलाशी अभियान चलाने के लिए कैनाइन दस्ते को भी तैनात किया गया।
तपोवन में बांध के पास स्थित टनल से मलबा हटाने का काम जारी है। SDRF, आर्मी और ITBP मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं।
चमोली जिले के तपोवन के धौलीगंगा में बचाव अभियान से 8 शव बरामद किए गए
विकराल बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान चलाने के लिए वायुसेना के विमान तथा हेलिकॉप्टर जौलीग्रांट हवाईअड्डा पहुंच गए हैं। हवाईअड्डे के निदेशक डीके गौतम ने यहां बताया कि वायु सेना के सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस के दो भारी परिवहन विमान व दो अन्य विमान रविवार देर शाम यहां पहुंच गए। उन्होंने बताया कि इसके अलावा एमआई-17 के तीन व एक एएलएच हेलीकॉप्टर भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए आए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की दो टीमें भी यहां बचाव तथा राहत कार्य के लिए भेजी गई हैं।
नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के कारण उत्तराखंड में आई आपदा के बाद धौली गंगा नदी का जलस्तर रविवार की रात एक बार फिर बढ़ गया। इसके चलते आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों में घबराहट पैदा हो गई। रविवार रात करीब आठ बजे अचानक धौली गंगा का जलस्तर बढ़ जाने के चलते अधिकारियों को एक परियोजना क्षेत्र में जारी राहत एवं बचाव कार्य को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
उत्तराखंड में धौली गंगा नदी पर स्थित तपोवन- विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 30-35 श्रमिकों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने रविवार देर रात यह जानकारी दी। उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में रविवार को ग्लेशियर के टूटने से अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक आई विकराल बाढ़ के कारण हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। परियोजना के महाप्रबंधक अहिरवार ने कहा कि जलविद्युत परियोजना क्षेत्र की एक सुरंग में श्रमिकों एवं अन्य कर्मचारियों समेत करीब 30-35 लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सुरंग को खोलने के लिए मलबे को हटाने के वास्ते जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
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