नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बच्चों की ख़रीदफ़रोख़्त से जुड़े मामले में गिरफ्तार बीजेपी नेता जूही चौधरी पर बड़ा खुलासा हुआ है। बीजेपी नेता की गिरफ्तारी की कहानी पूरी फिल्मी है। जूही चौधरी पर नजर रखने के लिए सीआईडी के अफसर साधु बनकर मंदिर में छुपे थे और एक महिला अफसर नन बनकर वहां रह रही थी।
इस मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुई, जब पश्चिम बंगाल पुलिस ने 18 फरवरी को जलपाईगुड़ी के विमला शिशु गृह में छापा मारकर वहां की मालकिन चंदना चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद चंदना के भाई और टीएमसी नेता मानस भौमिक को भी 23 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन इस मामले में मंगलवार रात को पुलिस को तब बड़ी कामयाबी मिली जब पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से बीजेपी नेता और महिला मोर्चा की महासचिव जूही चौधरी को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए जाने से पहले ज़ोरदार ड्रामा
सीआईडी को ख़बर मिली थी कि जूही चौधरी दार्जीलिंग में भारत-नेपाल सीमा से सिर्फ 10 मिनट की दूरी पर बसे खरीबाड़ी ब्लॉक के एक घर में है। ख़बर थी कि 10 दिन पहले पुलिस द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद नेपाल खिसक गई जूही चौधरी लौट आई हैं। वह लगातार फरार थीं, लेकिन इस बार पुलिस को उनके पक्के ठिकाने का सुराग मिला था, और वे नहीं चाहते थे कि उसे इसकी भनक मिले।
कुछ पुलिस वालों ने संन्यासियों का भेस धर लिया और भिक्षा मांगने के बहाने रेकी करने उस पते पर पहुंच गए। जब यह पक्का हो गया कि जूही चौधरी उसी पते पर मौजूद हैं, बाकी पुलिस वाले भी तुरंत ही वहां घुस आए।
सीआईडी के मुताबिक
- इस होम से अब तक 17 बच्चों की तस्करी की गई
- इनमें से कुछ बच्चों को फ्रांस और अमेरिका में बेचा गया
- फ्रांस में बेचे गए बच्चे के लिए होम ने 50 लाख रुपए वसूले
- इस होम में कुंवारी मां की डिलिवरी कराई जाती थी
- लोकलाज के डर से कुंवारी लड़कियां अपने बच्चों को यहां छोड़ देती थी
- बाद में होम से इन्हीं बच्चों को विदेशी दंपतियों को बेच दिया जाता था