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बीएसएनएल का निजीकरण राष्ट्रहित में नहीं: कांग्रेस

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 26, 2016 03:49 pm IST,  Updated : Jul 26, 2016 03:49 pm IST

राज्यसभा में मंगलवार को सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल के निजीकरण संबंधी प्रयास, निशक्तजनों का रोजगार कोटा भरा नहीं जाने तथा मिलावटी दूध सहित लोक महत्व के विभिन्न मुद्दे उठाए।

Anand Sharma- India TV Hindi
Anand Sharma

दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल के निजीकरण संबंधी प्रयास, निशक्तजनों का रोजगार कोटा भरा नहीं जाने तथा मिलावटी दूध सहित लोक महत्व के विभिन्न मुद्दे उठाए और सरकार से इनके तत्काल समाधान की मांग की।  माकपा के तपन कुमार सेन ने शून्यकाल में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल के निजीकरण संबंधी प्रयास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह देश हित में नहीं है और ऐसा किया गया तो देश भर में इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि सरकार रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के और लाभकारी उपक्रमों के निजीकरण एवं उनकी बिक्री की योजना बना रही है जो कि देशहित में कतई नहीं है।

सेन ने कहा ऐसा लगता है कि सरकार बेचने की जल्दबाजी में है और उसने अपने द्वारा नियुक्त नीति आयोग को बेचे जाने वाले उपक्रमों की सूची बनाने और आगे की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। एमटीएनएल और बीएसएनएल की कथित बिक्री की तैयारी संबंधी खबरों का संदर्भ देते हुए सेन ने कहा कि सरकार ऐसे समय पर राष्ट्रीय दूरसंचार कंपनी को निजीकरण के लिए निशाना बना रही है जब बीएसएनएल खुद को लाभकारी स्थिति में ले आया है। माकपा सदस्य ने कहा कि बीएसएनएल ने वर्ष 2014-15 में 471 करोड़ रुपए का मुनाफा अर्जित किया और 2015-16 में उसका मुनाफा 2400 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि जब बीएसएनएल मजबूत स्थिति में आ गया तब मीडिया की खबरों के अनुसार, सरकार इसे बेचने की योजना बना रही है।

सेन ने सरकार से विनिवेश संबंधी योजनाओ की समीक्षा करने का आग्रह करते हुए चेताया कि अगर बीएसएनएल का निजीकरण हुआ तो देश भर में इसका विरोध किया जाएगा। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी एक परिपत्र की वजह से निशक्तजनों का रोजगार कोटा भरा नहीं जा सका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निशक्तजनों के लिए बड़ी बड़ी बातें कीं, योजनाएं बताईं लेकिन अब तक न तो सरकार ने परिपत्र वापस लिया और न ही निशक्तजनों के अधिकार से संबंधित वह विधेयक पारित कराया जो वर्ष 2010 से राज्यसभा में लंबित है।

शर्मा ने कहा प्रधानमंत्री निशक्तजनों, कमजोर लोगों के बारे में बड़ी बड़ी बातें करते हैं। फिर आप वह विधेयक क्यों नहीं लाते। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि निशक्तजनों के अधिकार संबंधी विधेयक को सदन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बसपा के वीर सिंह ने देश में मिलावटी दूध की बिक्री होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में बेचे जा रहे 68 फीसदी दूध की गुणवत्ता स्तरीय नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दूध का सर्वाधिक उत्पादन करता है और देश में ही दूध की मांग तथा आपूर्ति में बड़ा अंतर है।

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