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20 लाख से कम कारोबार वाले GST के दायरे से बाहर, रेट पर फैसला अक्टूबर में

 Written By: Bhasha
 Published : Sep 23, 2016 09:13 pm IST,  Updated : Sep 23, 2016 09:13 pm IST

नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कार्यान्वयन की ओर बड़ा कदम बढाते हुए केंद्र व राज्यों ने 20 लाख रुपये तक का सालाना कारोबार करने वाली इकाइयों को इस नई बिक्री कर प्रणाली

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arun jaitley

नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कार्यान्वयन की ओर बड़ा कदम बढाते हुए केंद्र व राज्यों ने 20 लाख रुपये तक का सालाना कारोबार करने वाली इकाइयों को इस नई बिक्री कर प्रणाली से छूट देने पर आज सहमति जतायी। जीएसटी प्रणाली के कार्यान्वयन से इस समय लागू सभी उपकर उसीमें समाहित हो जायेंगे।

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जीएसटी परिषद की आज हुई बैठक में केंद्र और राज्यों ने इस प्रणाली के तहत आने वाली इकाइयों के कारोबार की न्यूनतम कारोबार सीमा व प्रशासनिक अधिकारों जैसे जुड़े विवादास्पद मुद्दों को सुलझाया वहीं जीएसटी दरों के बारे में फैसला 17-19 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर छोड़ दिया। तय न्यूतम कारोबार से नीचे की श्रेणी में आने वाली इकाइयों को जीएसटी प्रणाली से छूट होगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी अध्यक्षता में परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में संवाददाताओं से बातचीत में जेटली ने कहा कि जीएसटी के लिए न्यूनतम कारोबार की सीमा 20 लाख रुपये होगी। पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों में 10 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाइयों को इससे छूट मिलेगी। छोटे कारोबारियों पर दोहरे नियंत्रण के मुद्दे को सुलझाते हुए यह फैसला किया गया है कि जिन डीलरों का कारेाबार का 1.5 करोड़ रुपये सालाना तक है उन सभी पर राज्यों का विशेष अधिकार होगा।

जेटली ने कहा कि जिनका कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, दोहरे नियंत्रण से बचने के लिये उनसे केंद्र या राज्य के अधिकारी में से कोई एक पूछताछ करेगा। इसे तय करने के लिए एक व्यवस्था बनायी जाएगी। नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के कारण राज्यों के राजस्व में किसी प्रकार के नुकसान को लेकर मुआवजे का भुगतान के व्यापक सिद्धांतों पर भी चर्चा हुई।

सेवा कर को लेकर यह फैसला किया गया कि राज्यों में विशेषज्ञता के अभाव को देखते हुए 11 लाख सेवा करदाता जिनका आकलन फिलहाल केंद्र करता है, वे उनके साथ बने रहेंगे। जेटली ने कहा कि परिषद की अगली बैठक 30 सितंबर को होगी जिसमें छूटों के कार्यान्वयन से जुड़े मसौदा नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुआवजे के आकलन के लिये आधार वर्ष 2015-16 होगा और मुआवजे के भुगतान के लिये फार्मूले पर राज्य एवं केंद्र के बीच विचार होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि छूट सूची में उत्पादों की संख्या भी मौजूदा 300 से घटाकर 90 की गई है। बैठक में फैसला किया गया कि सभी उपकरों को जीएसटी में समाहित किया जाएगा। जीएसटी परिषद की यह पहली बैठक थी जो दो दिन चली। इसका आज आखिरी दिन था। जेटली ने कहा, उपकर समेत सभी चीजें जीएसटी में शामिल होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि परिषद मुआवजा कानून तथा मुआवजा फार्मूले के मसौदे पर काम कर रही है। मुआवजे के आकलन के लिये आधार वर्ष 2015-16 होगा और मुआवजे के भुगतान के लिये फार्मूले पर राज्य एवं केंद्र के बीच विचार होगा। अधिकारी मुआवजा फार्मूले के संदर्भ में प्रस्तुती देंगे जिसे परिषद की अगली बैठक 30 सितंबर को स्वीकार किया जा सकता है। जेटली ने कहा, जीएसटी परिषद में आज सभी निर्णय आम सहमति से किये गये।

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