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भारत का पाकिस्तान को इशारा, रद्द किया जा सकता है सिंधु जल समझौता

 Written By: India TV News Desk
 Published : Sep 22, 2016 09:39 pm IST,  Updated : Sep 22, 2016 09:46 pm IST

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच के मौजूदा तनाव की छाया आज 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि पर भी पड़ी जब भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी संधि के काम करने के

vikas swarup- India TV Hindi
vikas swarup

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच के मौजूदा तनाव की छाया आज 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि पर भी पड़ी जब भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी संधि के काम करने के लिए परस्पर विश्वास और सहयोग महत्वपूर्ण है।

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सरकार की ओर से यह बयान उस वक्त आया है जब भारत में ऐसी मांग उठी है कि उरी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए इस जल बंटवारे समझौते को खत्म किया जाए। यह पूछे जाने पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्या सरकार सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार करेगी तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ‘ऐसी किसी संधि पर काम के लिए यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्षों के बीच परस्पर सहयोग और विश्वास होना चाहिए।’

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उन्होंने कहा कि संधि की प्रस्तावना में यह कहा गया है कि यह सद्भावना पर आधारित है। फिर पूछे जाने पर कि भारत इस संधि को खत्म करेगा जो उन्होंने कोई ब्यौरा नहीं दिया और सिर्फ इतना कहा कि कूटनीति में सबकुछ बयां नहीं किया जाता और तथा उन्होंने यह नहीं कहा कि यह संधि काम नहीं कर रही है।

सितम्बर, 1960 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहल लाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच करांची में हुए इस समझौते के तहत रावी, सतलज और व्यास नदियों के पानी पर भारत का अधिकार है वहीँ झेलम, चिनाब और  सिंधु नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलेगा।

पाकिस्तान यह शिकायत करता आ रहा है कि उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है और वह कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए भी आगे गया है। स्वरूप ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच इस संधि के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद है।

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