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जस्टिस कर्णन का मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने से इनकार

 Written By: IANS
 Published : May 04, 2017 10:54 pm IST,  Updated : May 04, 2017 10:54 pm IST

न्यायमूर्ति कर्णन ने गुरुवार को अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच कराने से इनकार करते हुए इसके लिए घर पहुंची मेडिकल टीम को लौटा दिया और कहा कि वह मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ हैं।

Justice karnan- India TV Hindi
Justice karnan

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी. एस. कर्णन और देश की शीर्ष न्याय व्यवस्था के बीच गतिरोध जारी है। न्यायमूर्ति कर्णन ने गुरुवार को अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच कराने से इनकार करते हुए इसके लिए घर पहुंची मेडिकल टीम को लौटा दिया और कहा कि वह मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ हैं। कर्णन ने शीर्ष न्यायालय के सात न्यायाधीशों को 'आतंकवादी' और उनके आदेश को एक 'दलित न्यायाधीश' का अपमान करार दिया।

उन्होंने कहा, "मुझे इलाज की जरूरत नहीं है। रोगी को इलाज की जरूरत होती है और मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मैं रोगी नहीं हूं। हां, मैं नार्मल से भी अधिक हूं।"चिकित्सकों की यह टीम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायमूर्ति कर्णन के मानसिक स्वास्थ्य की जांच के लिए उनके घर पहुंची थी। कर्णन ने उनके घर पहुंची कलकत्ता पावलोव हॉस्पिटल के चार चिकित्सकों की टीम से कहा कि उनकी पत्नी तथा बेटे कोलकाता में नहीं हैं और उनके परिवार की अनुमति के बिना उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, "मेरी पत्नी और एक बेटा चेन्नई में हैं। एक बेटा विदेश में है। ऐसे में किसी अभिभावक, अपने परिवार की अनुपस्थिति में मैं आपको अपनी जांच की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि यह कानूनन गलत है।

कर्णन ने उनकी जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष के नाम लिखे एक हस्ताक्षरित पत्र में कहा, "आज (गुरुवार को) माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, आप और कोलकाता पुलिस विभाग की आपकी टीम पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ मुझे चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए पहुंची। लेकिन, मैंने इलाज कराने से मना कर दिया है क्योंकि मैं मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ हूं।" उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को एक 'दलित न्यायाधीश' का अपमान करार दिया।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने सोमवार को एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने और चार मई को कर्णन की जांच करके आठ मई तक जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति कर्णन न्यायपालिका का अपमान करने और सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने को लेकर अवमानना का सामना कर रहे हैं। कर्णन ने अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को 'पागल न्यायाधीशों का पागलपन भरा आदेश' करार दिया और कहा कि उन्होंने निशाना बनाया जा रहा है।

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