कोर्ट की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलब जस्टिस सी.एस. करनन ने स्पष्ट किया कि उन्हें दलित होने की वजह से काम करने से रोका जा रहा है और वह सु्परीम कोर्ट में हाज़िर नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ''हाईकोर्ट सु्परी कोर्ट से कमतर नही है और सु्प्रीम कोर्ट न तो मालिक है और न हाई कोर्ट नौकर।''
उन्होंने कहा कि यह आदेश जानबूझकर मेरे खिलाफ दिया गया है, जिससे मेरी जिंदगी और करिअर खराब हो जाए।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार हाईकोर्ट के किसी वर्तमान जज के खिलाफ वॉरेंट जारी किया है। बताया जा रहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस करनन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। इसके अलावा उन्हें 10 हजार का पर्सनल बॉन्ड भी भरने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को वारंट की तामील कराने को कहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए करनन ने कहा कि बिना किसी जांच, सबूत या बातचीच के प्रतिनिधित्व के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटो नोटिस जारी कर दिया।
जस्टिस करनन को 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए गए हैं। न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब हाई कोर्ट के सिटिंग जज को सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच ने अवमानना नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस करनन पर अदालत की अवमानना मामले की सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में नोटिस दिए जाने के बावजूद जस्टिस करनन सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए थे और सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट में पेश होने के लिए तीन हफ्तों का वक्त दिया था। इसके साथ ही जस्टिस करनन को कोई भी न्यायिक या प्रशासनिक काम करने पर रोक लगा दी थी।
गौरतलब है कि जस्टिस करनन को मद्रास हाई कोर्ट से कलकत्ता हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया था। चीफ जस्टिस ने उनके खिलाफ मिली शिकायतों के बाद ट्रांसफर किया था। वह मद्रास हाई कोर्ट में अपने पिछले कार्यकाल में भी विवादों में घिरे थे। पिछले साल जब उन्होंने शीर्ष अदालत के कोलेजियम द्वारा अपने ट्रांसफर को ही रोक दिया था, तो शीर्ष अदालत को दखल देना पड़ा था। इसके बाद हाई कोर्ट चीफ जस्टिस के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई थी। - See more at:
जस्टिस करनन ने कहा कि शांति भूषण और मुकुल रोहतगी के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि वे सवर्ण हैं।