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शादियां करवाकर मुश्किल में फंसी कमलनाथ सरकार, लोगों ने लगाया ये आरोप

मध्यप्रदेश में शादी और निकाह करने वाले करीब 28 हजार शादीशुदा चेहरों की चमक 51 हजार रुपए का इंतजार करते करते अब फीकी पड़ गई है। 4 महीने पहले शादी करने वाली आफरीन तब से मायके में हैं, पति के घर नही गई है क्योंकि पैसा नहीं मिला है। 

Reported by: Anurag Amitabh @anuragamitabh
Published : Nov 18, 2019 05:15 pm IST, Updated : Nov 18, 2019 05:15 pm IST
NGO- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV शादियां करवाने वाले एनजीओ संचालक भी परेशान

भोपाल। शादी करके फंसने का जुमला तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन ताज्जुब होगा ये जानकर कि शादी करवाकर कमलनाथ सरकार मुश्किल में फंस गई है। चुनावी वादे के तहत मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह योजना की रकम 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार कर अपनी पीठ थपथपाने वाली वाली कमलनाथ सरकार से अब तक करीब 28 हजार शादीशुदा जोड़ों को फूटी कौड़ी तक नसीब नहीं हुई है।

ऐसे में भाजपा का कहना है कि अगर सरकार कन्याओं को पैसे नहीं दे पा रही है तो सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए। कमलनाथ के इस वादे पर यकीन कर मध्यप्रदेश में कन्या विवाह और निकाह योजना के तहत सामूहिक शादियां भी हुईं और निकाह भी हुए, लेकिन इन शादीशुदा जोड़ों को 51 हजार रुपए देना अब कमलनाथ सरकार के लिए गले की फांस बन गया है।

मध्यप्रदेश में शादी और निकाह करने वाले करीब 28 हजार शादीशुदा चेहरों की चमक 51 हजार रुपए का इंतजार करते करते अब फीकी पड़ गई है। 4 महीने पहले शादी करने वाली आफरीन तब से मायके में हैं, पति के घर नही गई है क्योंकि पैसा नहीं मिला है। आफरीन और उसकी मां कह रही हैं कि निकाह हुए 4 महीने हो गए अगर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के पैसे मिल जाते तो लड़के के पास भेज देते दहेज के पैसे दे देते।

असल में फंड की समस्या की वजह कांग्रेस का चुनावी वादा जुमला बनकर रह गया है। वैसे तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना 2006 में शिवराज सरकार के दौरान शुरू की गई थी, जिसे 2015 में इसका नाम बदलकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना कर दिया गया था। इस योजना के तहत शादी या निकाह करने वाले जोड़ों को 28 हजार रुपए की अनुदान राशि दी जाती थी । लेकिन जनता से किए गए अपने वचन पत्र के वादे को पूरा कर सत्ता में आते ही कमलनाथ सरकार ने 28 हजार की राशि बढ़ाकर 51 हजार देने का एलान कर सामुहिक शादी और निकाह कराना शुरू कर दिया। इस योजना के लिए राशि देने का काम सामाजिक न्याय‌ विभाग के जिम्मे है।

प्रदेश के कुछ जिले जिनमें शादियां हुई लेकिन उन जोड़ों को अब तक पैसे नहीं मिले हैं

भोपाल 870, धार 3479, दमोह 1857, सागर 1587, झाबुआ 1590, खरगौन 1090, सिंगरौली 1089, छतरपुर 1076, खंडवा 1060, इंदौर 997, बालाघाट 920

शादी कराने वाले NGO बेहद परेशान

यही हालत प्रदेश के तमाम जिलों की है, जहां कमलनाथ सरकार की घोषणा के बाद अगस्त तक तकरीबन 28 हजार शादियां हो चुकी है लेकिन उनको मिलने वाले 51 हजार नहीं मिले हैं। ऐसे में इन गरीब तबकों की कन्याओं की शादी कराने वाले एनजीओ और वेलफेयर सोसाइटी वाले बेहद परेशान हैं। जारा वेलफेयर सोसाइटी के संचालक मुख्तार हसन ने बताया कि उन्होंने 200 शादियां कराई हैं उनमें से किसी को भी अब तक पैसे नहीं मिले हैं। उनके मेरे दफ्तर में लगातार लोग आते हैं।

इंडिया टीवी जब इस मामले की पड़ताल कर रहा था तभी जारा वेलफेयर सोसाइटी के दफ्तर में वह भाई भी पहुंचा जिसने अपनी बहन की शादी 4 महीने पहले कराई थी लेकिन अब तक उसे मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने वाली क्या 51 हजार रुपए की राशि नहीं मिली। वही हमें पुराने भोपाल में गोलू और पूजा नामदेव की मौसी भी मिली जो सरकार को कोसते नजर आईं। उन्होंने कहा कि महीनों हो गए अब तक कन्यादान योजना के तहत किए गए कमलनाथ के वादे के मुताबिक पैसे नहीं मिले, इससे अच्छी तो शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी, शादी करते ही पैसा भी मिल जाता था, खाना भी मिल जाता था।

पिछले सीजन का पैसा दिया नहीं, फिर हो रही शादियों की शुरुआत

ऐसे में जबकि जल्दी फिर से शादियों की शुरुआत हो रही है सरकार परेशान है कि पिछला पैसा दिया नहीं अगली शादियां कैसे कराएं सरकार के मंत्री पीसी शर्मा को उम्मीद है जल्द ही रुका हुआ पैसा मिल जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब 15 सालों बाद सत्ता में आई कमलनाथ सरकार अपने किसी वादे से पीछे हटते नजर आ रही है।

इससे पहले 10 महीने बीत जाने के बाद भी अधूरी कर्ज माफी की बात हो या अब मुख्यमंत्री कन्यादान निकाह योजना के तहत पैसे देने की कमलनाथ सरकार बैकफुट पर दिखाई देती है। इसपर भारतीय जनता पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा कहते है कि कमलनाथ के झूठे वादों के चलते सरकार के पास अगर कन्याओं को देने के लिए पैसा नहीं तो सामाजिक संगठनों को आगे आकर हम पैसा दिलाएंगे।

दरअसल शिवराज सिंह चौहान सरकार में शुरू की गई मुख्यमंत्री विवाह और कन्यादान योजना गरीब और पिछड़े तबकों के परिवारों के लिए थी जो आर्थिक तौर पर संपन्न नहीं होते थे ऐसे में कमलनाथ सरकार में इसी योजना की राशि के भरोसे पर शादी करने वाले परिवारों की हालत आसमान से गिरे खजूर पर अटके जैसी हो गई।

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