नयी दिल्ली: समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर विचार विमर्श के दायरे का विस्तार करते हुए विधि आयोग ने सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों से अपनी राय साझा करने का आह्वान किया है। इस विषय पर बातचीत के लिए उनके प्रतिनिधियों को निमंत्रित करने की योजना बनायी है।
आयोग ने इस विषय पर राजनीतिक दलों को प्रश्नावली भेजी है और उनसे 21 नवंबर तक अपनी राय भेजने को कहा है। सात अक्तूबर को भेजी गयी विधि आयोग की इस प्रश्नावली में लोगों से, क्या तीन बार तलाक कहने की प्रथा खत्म की जानी चाहिए, क्या समान नागरिक संहिता ऐच्छिक होनी चाहिए, जैसे संवदेनशील मुद्दे पर शायद पहली बार उनकी राय मांगी गयी है।
चुनाव आयोग में सात दल राष्ट्रीय स्तर पर और 49 दल क्षेत्रीय स्तर पर पंजीकृत है। राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, राकांपा, भाकपा, माकपा और तृणमूल कांग्रेस हैं।
विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) डॉ. बीएस चौहान ने सभी राजनीतिक दलों को लिखे पत्र में कहा है, ''आयोग कई दौर की चर्चा के बाद यह समझने के लिए एक प्रश्नावली तैयार की है कि आम लोग समान नागरिक संहिता के बारे में क्या महसूस करते हैं?''
उन्होंने लिखा, ''चूंकि राजनीतिक दल किसी भी सफल लोकतंत्र के मेरूदंड हैं, अतएव, इस प्रश्नावली के संदर्भ में सिर्फ उनकी राय ही नहीं बल्कि इससे संबंधित उनके विचार भी बहुत महत्वपूर्ण है।''