नई दिल्ली: हर देशवासी के लिए महात्मा गांधी इज़्ज़त का नाम हैं। आज़ादी की लड़ाई में बेमिसाल योगदान के लिए महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा जाता है लेकिन महात्मा गांधी के वो पोते, जिसे बापू बेहद प्यार करते थे, आज दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। आज की तारीख़ में वो दिल्ली के एक वृद्ध आश्रम यानी ओल्ड एज होम में ज़िंदगी बिताने पर मजबूर हैं।
महात्मा गांधी के पोते कनुभाई रामदास गांधी में न किसी को रास्ता दिखाने का हौसला और न आगे बढ़ने का ज़ज़्बा। एक छोटे से कमरे में और कुछ दोस्तों के साथ अब इनकी ज़िंदगी की सुबह और शाम होती है। दिल्ली का ओल्ड एज़ होम में कनुभाई गांधी और उनकी 85 साल की पत्नी रहते हैं। ये किसी को नहीं पता, बस इतना पता है कि सवा अरब के देश में बापू के प्रपौत्र का कोई घर नहीं है। कोई ऐसा नहीं है जो इस बुजुर्ग दंपती का रखवाला हो। वह पिछले एक हफ़्ते से दिल्ली के गुरु विश्राम वृद्ध आश्रम में हैं।

बापू के साथ करीबी की दास्तान
बापू के साथ कनुभाई की इस क़रीबी की भी एक दास्तान है। दरअसल, महात्मा गांधी और कस्तूरबा के चार बेटे थे-हरिलाल, मणिलाल रामदास और देवदास। कनुभाई रामदास गांधी की तीन बच्चों में दूसरे नंबर पर थे।
अपने तीसरे बेटे रामदास से गांधी जी को काफ़ी लगाव था हालांकि रामदास गांधीजी के कई विचारों से सहमत नहीं थे लेकिन बापू के सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कहते हैं कि इसके बाद बापू के कहने पर रामदास दक्षिण अफ्रीका चले गए। पिता-पुत्र के बीच शर्त ये थे कि रामदास के बेटे कनुभाई की पूरी देखभाल अब बापू ही करेंगे।
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