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SAARC सम्मेलन में पाक के रवैये पर मोहन भागवत ने साधा निशाना

 Written By: Bhasha
 Published : Aug 06, 2016 08:19 am IST,  Updated : Aug 06, 2016 01:47 pm IST

स्लामाबाद में SAARC सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के रवैये की भारतीय संसद में निंदा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी कहा कि वह 'द्वेष की पराकाष्ठा' के चलते अपनी नाक कटवा कर भी भारत का बुरा चाहता है।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
Mohan Bhagwat

इंदौर: इस्लामाबाद में SAARC सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के रवैये की भारतीय संसद में निंदा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी मुल्क पर शुक्रवार को परोक्ष तौर पर निशाना साधा और कहा कि वह 'द्वेष की पराकाष्ठा' के चलते अपनी नाक कटवा कर भी भारत का बुरा चाहता है।

भागवत ने इंदौर में एक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में पाकिस्तान की ओर सीधा इशारा करते हुए कटाक्षपूर्ण लहजे में कहा, 'द्वेष की पराकाष्ठा तो ऐसी है कि हमारी (पाकिस्तान की) अपनी हालत पतली है। लेकिन हम (पाकिस्तान) अपनी नाक कटवा कर भी पड़ोसी (भारत) के लिए अपशकुन करेंगे. हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) ऐसा ही बर्ताव कर रहा है।'

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उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, 'बन गए अलग (मुल्क) ठीक है बन गए। हम मदद करने के लिए तैयार हैं.. अपने बल पर खड़े हो जाओ. हम जब बार-बार दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, तो वह (पाकिस्तान) ऐसी व्यवस्था करता है कि हम दोस्ती का हाथ न बढ़ा सकें।'

भागवत ने कहा कि दुनिया के मुल्कों में महाशक्ति (सुपर पॉवर) बनने के लिए स्पर्धा चल रही है, जिससे विकसित और विकासशील देश पिस रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वैश्विक चिंतक सोच रहे हैं कि अगर ये स्पर्धा ऐसी ही चली, तो दुनिया बचेगी या नहीं। दुनिया अपने सवालों के जवाब के लिए भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। इन प्रश्नों के उत्तर देकर हम दुनिया के सिरमौर राष्ट्र बन सकते हैं।'

भागवत, छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन चरित्र बताने वाली मराठी किताब 'शककर्ते शिवराय' के हिन्दी अनुवाद पर आधारित पुस्तक 'शकनिर्माता शिवराय' के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। मराठी में यह किताब विजयराव देशमुख ने लिखी है, जबकि मोहन बांडे ने इसका हिन्दी अनुवाद किया है। संघ प्रमुख ने लोकार्पण समारोह में कहा कि शिवाजी के समय 'सांप्रदायिकता' और 'धर्मनिरपेक्षता' जैसे शब्द चलन में नहीं थे। लेकिन वह शासक के रूप में सभी मनुष्यों के प्रति समान भाव रखते हुए अपने कर्तव्य का पालन करते थे।

उन्होंने कहा कि इन दिनों देश में शासन करने वाले सभी लोगों को शिवाजी के राज से सुशासन की प्रेरणा लेनी चाहिए, भले ही मौजूदा शासनकर्ता किसी भी राजनीतिक दल से क्यों न ताल्लुक रखते हो। भागवत ने कहा, 'आज देश में धर्म की सुरक्षा के सामने कमोबेश वे ही चुनौतियां है, जो शिवाजी के समय थीं। इस सिलसिले में शिवाजी के समय और मौजूदा हालात में कोई विशेष अंतर नहीं है। यहां धर्म से मेरा तात्पर्य किसी संप्रदाय से नहीं है, बल्कि लोगों के उस स्वाभाविक कर्तव्य से है जिसके पालन से सब मनुष्य सुखी होते हैं और हमेशा एकजुट रहकर उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हैं।'

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