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एक ही जेल में शिफ्ट किये गये निर्भया के चारों मुजरिम, पहली बार भीड़ से भरा होगा फांसी घर

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jan 17, 2020 07:49 am IST,  Updated : Jan 17, 2020 07:49 am IST

फांसी की तारीख पर कभी 'हां', कभी 'न' के बीच निर्भया के हत्यारों को तिहाड़ जेल परिसर के कारावास नंबर तीन में स्थानांतरित कर दिया गया है जहां उन्हें फांसी पर लटकाया जाना है।

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एक ही जेल में शिफ्ट किये गये निर्भया के चारों मुजरिम, पहली बार भीड़ से भरा होगा फांसी घर Image Source : PTI

नई दिल्ली: फांसी की तारीख पर कभी 'हां', कभी 'न' के बीच निर्भया के हत्यारों को तिहाड़ जेल परिसर के कारावास नंबर तीन में स्थानांतरित कर दिया गया है जहां उन्हें फांसी पर लटकाया जाना है। यह वही तीन नंबर जेल है जिसमें फांसी-घर मौजूद है। इस बीच तिहाड़ जेल प्रशासन भी अपनी तैयारियों में जोर-शोर से जुटा है। मामले में आरोपी विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, मुकेश कुमार सिंह और पवन गुप्ता को 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी।

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जेल नंबर तीन में एक साथ बंद किये जाने का मतलब यह नहीं है कि, ये चारों अब एक दूसरे के बेहद करीब पहुंच गये हों। इनकी जेल नंबर तो तीन ही है। मगर जेल नंबर तीन में भी इनकी बैरक-वार्ड-सेल अलग-अलग हैं। एक ही जेल की अलग अलग बैरक में बंद होने के बाद भी इन सबको एक दूसरे की शक्ल तक देखने को नहीं मिलेगी। 

ये चारों मुजरिम सिर्फ और सिर्फ फांसी घर में फांसी के फंदों के नीचे खड़े होकर ही मिल पायेंगे। वहां भी मगर एक दूसरे के बेहद करीब पहुंचने/ खड़े होने के बाद भी इन चारों में से कोई किसी को देख पाने की हालत में नहीं होगा। इसकी भी वजह है। इनकी काल-कोठिरियों से फांसी लगाने को ले जाते वक्त इनके चेहरे काले कपड़े से ढंक दिये जायेंगे। पांवों में बेड़ियां और पीछे की ओर मोड़कर हाथों में हथकड़ियां पड़ी होंगी। 

तिहाड़ जेल महानिदेशालय सूत्रों के मुताबिक, 'चारों को चूंकि एक ही समय पर फांसी के तख्ते पर ले जाकर खड़ा करना है। तो एक साथ ही काल-कोठरियों से फांसी घर तक पहुंचाने के लिए निकालना होगा। मगर उस वक्त बेहद सतर्कता और शांति बरती जायेगी। ताकि किसी भी मुजरिम के फांसी घर में पहुंचने की आहट या भनक किसी दूसरे तक न पहुंचने पाये। इसके पीछे प्रमुख वजह होगी, ऐन वक्त पर एक साथ होते ही कहीं ये चारों कोई बखेड़ा न खड़ा कर दें।'

हांलांकि एक साथ चूंकि तिहाड़ जेल के फांसी घर में चार-चार मुजरिमों को पहली बार फांसी लग रही है। इसलिए यह भी पहला मौका होगा जब, तिहाड़ जेल के फांसी घर में जेल अधिकारी- कर्मचारियों, तमिलनाडू स्पेशल पुलिस के हथियारबंद जवानों की तादाद भी कहीं ज्यादा होगी। मतलब फांसी घर में होगी तो शमशान सी शांति, मगर भीड़ इससे पहले लगाई गयी फांसी के मौकों से कहीं ज्यादा होगी।

फांसी कोठरी में अंदर घुसते ही लेफ्ट साइड में फांसी का तख्ता है। इसमें फांसी देने वाले प्लैटफॉर्म के नीचे एक बेसमेंट बनाया गया है। बेसमेंट में जाने के लिए करीब 20 सीढ़ियां हैं। जिनसे नीचे उतरकर फांसी पर लटकाए गए कैदी का शव बाहर निकाला जाता है। फांसी कोठरी के ऊपर कोई छत नहीं है। इससे नजदीक एक छोटा सा पार्क भी बनाया गया है। जहां इन 16 सेल में रखे जाने वाले खतरनाक कैदी सैर करते हैं।

क्यों नहीं हो सकती 22 जनवरी को फांसी?

पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया केस के दोषी मुकेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील मानते हुए कहा कि दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि उनकी दया याचिका लंबित है। कोर्ट ने कहा कि दया याचिका लंबित होने के कारण डेथ वॉरंट पर स्वतः ही रोक लग गई है।

(Input IANS)

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