
जानिए, रथ यात्रा कैसे और कहां तक निकलेगी
भगवान जगन्नाथ, उनके बडे़ भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा मंदिर के गर्भगृह से मंगल आरती और मैलम जैसे कई विशेष अवसरों पर बाहर निकलते हैं। रत्न सिंहासन से उतरकर तीनों देवी-देवता को मंदिर से बाहर 22 कदम दूर सिंह द्वार से ले जाया जाता है जिसे बैसी पहाचा के नाम से जाना जाता है।
श्रद्धालु और सेवायत उनकी एक झलक पाने और उन्हें छूने के लिए लालायित रहते हैं। लयबद्ध तरीके से देवी- देवता कदम दर कदम आगे बढ़ते हैं और इस दौरान घंटा, कहाली और शंखनाद किया जाता है। सबसे पहले सुदर्शन को बाहर लाया जाता है और देवी सुभद्रा के रथ में रखा जाता है जिसके बाद बलभद्र, सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ आते हैं।
देवी-देवताओं को दो किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर में हर वर्ष ले जाया जाता है जो नौ दिन की यात्रा होती है। लकड़ी के तीनों रथ लाल, काले, हरे और पीले कपड़े से ढंककर बाहर रखे जाते हैं। 45 फुट लंबा नंदीघोष लकड़ी के 16 बड़े पहिये पर टिका होता है जो भगवान जगन्नाथ का रथ है।
14 पहिये वाला 44 फुट उंचा तलध्वज बलभद्र के लिए और 12 पहिये वाला 43 फुट उंचा दर्पदलन रथ देवी सुभद्रा के लिए होता है। पुरी गोवद्र्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ रथ पर दर्शन देते हैं। इसके बाद पुरी के राजा गजपति दिव्यांश सिंह देव सोने के झाड़ू से प्लेटफॉम की सफाई कर छेरा पनहारा विधि पूर्ण करते हैं। इस प्रक्रिया को ओडि़शा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सहित काफी संख्या में वीवीआईपी के अलावा लाखों की संख्या में श्रद्धालु देखने आते हैं।
सुरक्षा के इंतजाम हैं पुख्ता
समारोह के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन पुख्ता व्यवस्था करता है। वाहनों की पार्किंग के लिए पार्किंग स्थल बनाए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल और साफ-सफाई जैसी कई व्यवस्थाएं की जाती हैं जबकि गर्मी से श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए पानी छीटने की व्यवस्था की जाती है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि रथयात्रा के लिए यहां आने वालों का पुलिस और अन्य कर्मी मार्गदर्शन करते है। इससे पहले दर्शकों को सोशल मीडिया और पुरी पुलिस प्रशासन की वेबसाइट के माध्यम से यातायात व्यवस्था के बारे में सूचना दी गई। इस उत्सव पर होने वाली अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए ईस्ट कोस्ट रेलवे विशेष रेलगाडि़यों का संचालन कर रहा है। शहर भर में काफी संख्या में कैमरा लगाए गए हैं जिसके लिए एकीकृत निगरानी नियंत्रण कक्ष जगन्नाथ मंदिर के पास है।