नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को मांग की कि भोपाल केंद्रीय कारागार से भागने के बाद सिमी के कथित कार्यकर्ताओं को पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए। केजरीवाल ने ट्वीट किया, "हम (सिमी कार्यकर्ताओं के मारे जाने के मामले की) जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग करते हैं।"
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एक पत्रकार ने इस मुठभेड़ पर राज्य सरकार की ओर से पेश कथ्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुजराज मॉडल हर जगह दोहराया जा रहा है। इसके जवाब में केजरीवाल ने कहा, "यह बहुत गंभीर है।"
पुलिस के साथ मुठभेड़ में सिमी कार्यकर्ताओं के मारे जाने के सरकारी बयान में विसंगति का आरोप लगाते हुए एमआईएमआईएम के प्रमुख असादुद्दीन ओवैसी ने सभी तथ्यों को सामने लाने के लिए आज उच्चतम न्यायालय द्वारा जांच की मांग की।
उन्होंने कहा, गृहमंत्री और पुलिस अधिकारी जो कुछ कह रहे हैं, उनमें बड़ी विसंगति है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री कहते हैं कि ये विचाराधीन कैदियों के पास चम्मच थे। यदि उनके पास महज चम्मच थे तो एटीएस आसानी ने उन्हें पकड़ सकती थी क्योंकि एटीएस के पास सारे अत्याधुनिक हथियार होते हैं। वह आसानी से उन्हें गिरफ्तार कर सकती थी।
उन्होंने कहा, लेकिन, जो लोग गार्ड की हत्या करने के बाद जेल से भागे हों और उनके पास महज चम्मच हों...यह बात किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिये अविश्वसनीय है।
हैदराबाद के सांसद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की जांच से सारे तथ्य तथा उन्हें दबाने की की कोई भी कोशिश सामने आ जाएगी। इसके पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी इस मुठभेड़ की घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
पुलिस ने कहा है कि प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के आठ सदस्य सोमवार को भोपाल केंद्रीय कारागार से भाग गए थे, जिन्हें शहर के बाहर पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया।