
रोहतक जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, "राजनेता ऐसे मामलों पर ध्यान नहीं देते क्योंकि उनके स्पीड ब्रेकर हटाए जाने से जिला पंचायत नाराज हो सकती है। ऐसे में राजनेता स्थानीय अधिकारियों से ऐसे स्पीड ब्रेकरों के नहीं हटाने का निर्देश देते हैं।"
जुलाई 2014 में पीडब्ल्यूडी मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा विधानसभा को बताया था कि राज्य से गुजरने वाले महामार्गो और राजमार्गो पर स्थित स्कूलों, रिहायशी इलाकों पर बेतरतीब ढंग से स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। ये स्पीड ब्रेकर अवैध हैं और इनके निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया है।
केंद्र सरकार की नीति के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोई भी स्पीड ब्रेकर नहीं होना चाहिए। जहां तक राज्य सरकारों की नीति की बात है तो उसमें रफ्तार कम करने के लिए छोटे स्पीड ब्रेकर बनाने का उल्लेख है।
इंडियन रोड कांग्रेस के मुताबिक एक स्पीड ब्रेकर सिर्फ चार इंच ऊंचा होना चाहिए और इसकी चौड़ाई एक मीटर होनी चाहिए. साथ ही इस पर 1.25 मीटर की ढलान होनी चाहिए। सभी स्पीड ब्रेकरों से पहले रोड साइन होना चाहिए और स्पीड ब्रेकरों पर सफेद पट्टी होनी चाहिए, जिससे कि ये वाहन चालकों को दूर से दिख सकें। बीते सालों में सरकार ने कुछ अवैध स्पीड ब्रेकरों को हटाया था लेकिन कुछ दिनों बाद ही लोगों ने नए स्पीड ब्रेकर बना लिए।
हरियाणा से दिल्ली-अम्बाला-अमृतसर एनएच-1, दिल्ली-आगरा-वाराणसी-दानकुनी एनएच-2, दिल्ली-जयपुर-अहमदाबा-मुम्बई एनएच-8, दिल्ली-हिसार-फाजिल्ला-भारत-पाकिस्तान सीमा एनएच-10 तथा पंचकुला-रुड़की एनएच-73 जैसे अहम राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं।
अवैध स्पीड ब्रेकरों की समस्या सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गो पर ही नहीं है। कस्बों और शहरों तक जाने वाली सड़कों पर अवैध तरीके से बड़ी संख्या में स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। हरियाणा सरकार ने 1051 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है, जहां सही मायने में स्पीड ब्रेकरों की जरूरत है। पवार ने कहा कि इनमें से 915 स्थानों पर स्पीड ब्रेकर बना दिए हैं और बाकी जगहों पर काम जारी है।